आइल बजट के पारी
आवेला फागुन मार्च, हीया हरषे ना, काहे मोर,
चेटवा पो डाका डाले, एही घड़ी बेदर्दी दरवारी;
लेखा-जोखा के दास्तवेज कह, पेश करे हमरा बीच,
आमद से खरचा देखावे बड़ा भारी ।
ना छोड़िहे कर वा लगा के, दबावे बड़ा भारी,
चाहे जाये खेती-बारी;
होली होता सरकारी, दिल्ली से होली होता सरकारी ।
कड़ा कदम के मारे पिचकारी, थिरकन लागे बस बड़-बड़ व्यापारी आ मुरछा पड़े सब कर्मचारी,
छव वीच कवनो एगो देबे रंग डारी, होली होता सरकारी । दिल्ली से……
कोटा कंट्रोल डेढ़ा चिनिया बिकववले हवा गाड़ी सस्ते में देले,
कहलन उदारी करब,
अपने भइलन उदरधारी
होली होता सरकारी । दिल्ली से……
दपर्ण तहलका में चेहरा चिन्हवले, तुमुल के धूल दर्पणवा पो देले,
मंत्री सलहिआ से करे केहू गारा-गारी,
झूठ कहे ह आरोप, देलऽ बदला के गारी,
बाकी ताबूत में लगइबऽ कतना जोरा-जोरी,
होली होता सरकारी । दिल्ली से…….
सूतल सपनवा के पूरा करबो एक दिन,
अवध बइठइबो एक पुजारी,
घंटवा बजाइब मंदिरवा में जाइ के, आस्था वा अटल, कोर्ट कुछुओ बिचारी,
होली होता सरकारी । दिल्ली से…….
अभी सतमेझरा के पड़ल बडुवे फेरा-फेरी,
छीने खातिर कुर्सी के होता जोरा-जोरी,
ना जाने कब अइहें हमरा लगे झोरी, होली होता सरकारी । दिल्ली से……


