लालू चिंतन
लालू है लोहिया का नाम, करते हैं निर्बल का काम;
मंडल का बस माला पहने, जपते हैं पिछड़ो का नाम।
पुरी, द्वारिका, काँचीपुरम, ये एक नया बनवा देंगे;
छोड़ कमंडल मंदिर से तो, हर घर हीं मंदिर सा बनवा देंगे।
वर्गाश्रम को आहुति देकर,
भेद मिटाकर, ममता को फैला देंगे; गाँधी, पटेल, अम्बेदकर, आजाद के घर, क्रांति का लालटेन हरा लहरा देंगे।
पढ़ा लिखाकर चरवाहे को, कनवेन्ट के उपर ला देंगे;
दलितों-पिछड़ों के झंडा को, उपर लाल किला के फहरा देंगे।
लगता है लालू ही अब तो, सारा देश चलायेंगे।
लोहिया के सपनों का भारत, एक दिन यही बनायेंगे।
राम-रहीम-घनश्याम सभी को संग साथ रखवायेंगे;
भारत-पाक मिलाकर के, एक वृहतर हिन्दुस्तान बनायेंगे।
जब सारा भूसा तेरे भेजे में रखा जाता है, कैसे कहते हो लालू केवल चारा खाता है?
सामने खूटे पर गाय, घर में राबड़ी हो जिसके, दूध पी सकता है,
चारा नहीं राबड़ी खा सकता है।
गोबर गणेश पर ऐपन वास्ते दही तुम्हें भी मिलता है,
क्या समझ नहीं आता है?
जोड़ा तुमने नाता दलितों से, पीड़ितों से,और जोड़ा है हर गाँव से;
मैं भी जोड़ना सोच लिया अब,
तेरे ही बस छाँव से।
हे सम्पूर्ण क्रांति के पुष्प, किये रहो बगिया को सुरभित;
नई चेतना के फल से कभी न रखना जन को बंचित।


