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बागपत के ज़ीरो वेस्ट महोत्सव मॉडल की राष्ट्रीय मंच पर हो रही चर्चा, देशभर से लोग भेज रहे सुझाव।

“भक्ति भी, प्रकृति भी” के संकल्प से सीएम योगी के विजन को साकार कर रहा बागपत प्रशासन।
ज़ीरो वेस्ट महोत्सव से राष्ट्रीय मानचित्र पर पहचान बना रहा श्री परशुरामेश्वर पुरा महादेव मंदिर

RKTV NEWS/बागपत(उत्तर प्रदेश)16 मई। बागपत का “जीरो वेस्ट महोत्सव” मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है। श्री परशुरामेश्वर पुरा महादेव मंदिर में आयोजित इस अनोखी पहल ने ऐसा प्रभाव छोड़ा है कि अब देशभर से लोग इसके लिए अपने सुझाव, विचार और नवाचार भेज रहे हैं। भारत सरकार के राष्ट्रीय जन सहभागिता मंच माय गवर्नमेंट पर बागपत मॉडल को लेकर लगातार शुरू हुई चर्चा से धार्मिक आयोजनों को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाने की यह पहल अब राष्ट्रीय प्रेरणा बनती जा रही है। अभी तक देशभर से सैकड़ों सुझाव प्राप्त हो चुके हैं और लोग आगामी श्रावणी मेले को लेकर भी अपने विचार साझा कर रहे हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आस्था का प्रमुख केंद्र और देश के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवों में शामिल बागपत के ऐतिहासिक एवं पौराणिक श्री परशुरामेश्वर पुरा महादेव मंदिर में वर्ष 2026 के फाल्गुनी महाशिवरात्रि मेले को पहली बार “जीरो वेस्ट महोत्सव” के रूप में आयोजित किया गया। इस पहल ने न केवल मेले की पहचान बदली, बल्कि यह भी साबित किया कि धार्मिक आयोजन आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी मजबूत माध्यम बन सकते हैं। यही कारण है कि यह मॉडल अब पूरे देश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में धार्मिक आयोजनों को सुरक्षित, स्वच्छ, सुव्यवस्थित और भव्य बनाने की जो परंपरा स्थापित हुई है, पुरा महादेव मेला उसका जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। जिला प्रशासन ने मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं—आस्था का सम्मान, स्वच्छता का संकल्प, सुरक्षा की गारंटी और तकनीक के उपयोग—को पूरी प्रतिबद्धता के साथ धरातल पर उतारा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से प्रेरित होकर जिलाधिकारी अस्मिता लाल के नेतृत्व में बागपत प्रशासन ने मेले से निकलने वाले कचरे और पूजन सामग्री को उपयोगी संसाधनों में बदलकर एक नई मिसाल कायम की, जिसकी गूंज अब प्रदेश से निकलकर देशभर तक पहुंच रही है।
पुरा महादेव मंदिर की प्राचीनता और धार्मिक महत्ता सदियों से श्रद्धालुओं को आकर्षित करती रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और अन्य राज्यों से भी लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मान्यता है कि इस पवित्र स्थल पर भगवान शिव का जलाभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस वर्ष यह मेला एक और कारण से ऐतिहासिक बन गया क्योंकि मंदिर के इतिहास में पहली बार इसे “जीरो वेस्ट महोत्सव” के रूप में आयोजित किया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्वच्छ उत्तर प्रदेश और पर्यावरण संरक्षण की नीति को आगे बढ़ाते हुए बागपत प्रशासन ने संदेश दिया कि आस्था और प्रकृति संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। मेले से उत्पन्न अवशेषों जैसे शिवलिंग पर चढ़ाए गए फूल, खाद्यान्न सामग्री, दूध, कलावा तथा मंदिर परिसर से निकले जूते-चप्पल और प्लास्टिक बोतलों को उपयोगी वस्तुओं में बदलकर बागपत ने एक अभिनव मॉडल प्रस्तुत किया।
प्लास्टिक बोतलों के वेस्ट से रुई जैसे बारीक रेशे तैयार कर बागपत की स्थानीय संस्कृति को दर्शाने वाली ‘नन्ही कली’ देसी डॉल बनाई गई, जो बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाने के साथ आत्मनिर्भरता का संदेश भी दे रही है। वहीं मंदिर परिसर में छोड़े गए जूते-चप्पलों से तैयार मैट अब आंगनवाड़ी केंद्रों और बच्चों की पढ़ाई में उपयोग किए जा रहे हैं। खराब चप्पलों से आकर्षक सेल्फी पॉइंट भी बनाए गए, जो लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं और यह संदेश दे रहे हैं कि कचरा भी संसाधन बन सकता है। कलेक्ट्रेट में प्रवेश द्वारा के निकट वेस्ट प्लास्टिक से बना बागपत का आकर्षक सेल्फ़ी पॉइंट खुद इस मेले की सफलता की कहानी कह रहा है।
शिवलिंग पर चढ़ाया गया दूध और खाद्यान्न सामग्री गौशालाओं तक पहुंचाई गई, जबकि कलावा से सजावटी संरचनाएं और सेल्फी पॉइंट तैयार किए गए। पूजा में चढ़े फूलों को सोलर ड्रायर से सुखाकर अगरबत्ती बनाई गई, जो दोबारा मंदिर और पूजा-पाठ में उपयोग हो रही है। इस प्रकार जीरो वेस्ट महोत्सव ने स्वच्छता के साथ आत्मनिर्भरता और पुनर्चक्रण का भी प्रभावी संदेश दिया।
जीरो वेस्ट महोत्सव की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए भगवान शिव के जलाभिषेक में अर्पित पवित्र जल को भी व्यर्थ नहीं जाने दिया गया। विशेष व्यवस्था के तहत इस जल को संरक्षित कर पशु-पक्षियों, असहाय कुत्तों और उन गौशालाओं तक पहुंचाया गया, जहां निराश्रित गोवंशों की देखभाल की जा रही है। यह पहल भारतीय संस्कृति की उस मूल भावना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करती है, जिसमें प्रकृति और प्राणी मात्र की सेवा को ही सच्ची ईश्वर भक्ति माना गया है।
“भक्ति भी, प्रकृति भी” के संदेश के साथ यह आयोजन स्वच्छता और श्रम सम्मान का भी बड़ा उदाहरण बनकर उभरा। मेले को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाए रखने वाले सफाईकर्मियों को प्रशासन ने विशेष सम्मानित किया। चौबीसों घंटे ड्यूटी निभाने वाले इन सफाई योद्धाओं का अभिनंदन कर जिला प्रशासन ने यह संदेश दिया कि सुशासन की पहचान केवल व्यवस्थाओं से नहीं, बल्कि श्रम के सम्मान से भी होती है।
बागपत प्रशासन का मानना है कि हमारे पर्व और त्यौहार सदियों से खुशहाली, समृद्धि और आनंद के प्रतीक रहे हैं और भगवान शिव प्रकृति के अधिपति माने जाते हैं। यही कारण है कि जिले और मंदिर के इतिहास में पहली बार महाशिवरात्रि मेले को जीरो वेस्ट महोत्सव के रूप में आयोजित कर एक नया इतिहास रचा गया, जिसकी गूंज अब पूरे देश में सुनाई दे रही है।
काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या धाम और मथुरा की तरह अब पुरा महादेव मेला भी प्रदेश के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में नवाचार से अपनी नई पहचान बना रहा है। यह मेला केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सुशासन, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक समृद्धि का भी प्रतीक बनकर उभरा है। आस्था, स्वच्छता, सुरक्षा और तकनीक का यह संगम अब दूसरे राज्यों और जिलों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनता जा रहा है।
देशभर से मिल रहे सुझावों और बढ़ती भागीदारी ने यह साबित कर दिया है कि बागपत का यह मॉडल केवल एक स्थानीय पहल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनाए जाने योग्य प्रयोग बन चुका है। बागपत प्रशासन ने इस जीरो वेस्ट महोत्सव पर आधारित एक विशेष रिपोर्ट भी जारी की है, जिसमें देशभर के किसी भी जनपद या मंदिर स्थल पर ऐसे आयोजनों को जीरो वेस्ट महोत्सव में बदलने का विस्तृत ब्लूप्रिंट शामिल किया गया है। मिशन लाइफ और स्वच्छ भारत अभियान जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़ी यह पहल अब देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है।
देशभर में बड़े धार्मिक आयोजनों में निकलने वाले कचरे और अवशेषों का प्रबंधन हमेशा से एक गंभीर चुनौती रहा है, जहां भीड़ और आस्था के बीच स्वच्छता और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना कठिन माना जाता रहा है। ऐसे में बागपत जनपद की प्रशासनिक इच्छाशक्ति और नवाचार ने यह दिखाया है कि यदि मजबूत संकल्प और सही व्यवस्था हो, तो इस चुनौती को एक अवसर में बदला जा सकता है।

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