RK TV News
खबरें
Breaking Newsधार्मिक

रोहतास :भोज भंडारे के साथ श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का हुआ समापन।

सासाराम/ रोहतास (रविशंकर तिवारी)24 जनवरी।रामेश्वरगंज चलानिया सासाराम में चल रहे श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का पूर्णाहुति पूरे विधि विधान के साथ संपन्न हुआ। भारत के महान मनीषी संत श्री लक्ष्मी प्रपन्‍न जीयर स्वामी जी महाराज के सानिध्य में चल रहे श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ की पूर्णाहुति के अवसर पर भोज भंडारे का भी आयोजन किया गया था जिसमें हजारों हजार की संख्या में लोगों ने पंक्तिबद्ध होकर के यज्ञ का प्रसाद ग्रहण किया।
वहीं यज्ञ के समापन के अवसर पर सैकड़ो की संख्या में साधु महात्माओं को प्रसाद ग्रहण करा करके वस्त्र देकर के उनको विदाई भी किया गया यज्ञ समिति के द्वारा पूर्णाहुति के अवसर पर भंडारे एवं विदाई की विशेष व्यवस्था की गई थी वहीं 19 जनवरी से चल रहे इस महायज्ञ में अनेकों संत, महात्मा, विद्वान जनों के द्वारा लगातार कथा श्रवण कराया जा रहा था यज्ञ समापन के दिन भी भारत के अलग-अलग क्षेत्र से पधारे संत महात्मा विद्वान जनों ने भी अपनी अमृतमय वाणी से भक्त श्रद्धालुओं को भक्ति का संदेश दिया।
भारत के महान मनीषी संत श्री जीयर स्वामी जी महाराज ने प्रवचन करते हुए धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि धर्म तभी से शुरू हो जाता है जब से सृष्टि का निर्माण होता है धर्म एक ऐसा पद्यती है जिसका जन्म भी सृष्टि के साथ ही होता है धर्म सृष्टि के बाद बनाया जोड़ा या बदला नहीं जा सकता है क्योंकि जिस प्रकार से एक व्यक्ति की पहचान जन्म के बाद मृत्यु तक उसके स्वरूप के साथ होती है।
उसी प्रकार से इस धर्म की पहचान भी सृष्टि के साथ ही शुरू होती है और जब तक सृष्टि रहती है तब तक धर्म भी रहता है धर्म एक बदलने वाला नियम नहीं है बल्कि यह एक ईश्वर का दिया हुआ स्वरूप है जिसमें मानव जीवन की पूरी नैतिकता को परिभाषित की गई है।
प्राणी के जन्म के बाद और मृत्यु के पहले तक उसके आहार, व्यवहार, रहन-सहन, उठन बैठन को व्यवस्थित करने का एक प्रणाली है जिसके साथ पूरी जीवन प्रणाली को व्यवस्थित करने का हमें शिक्षा प्राप्त होता है मंदिर में जाकर के केवल पूजा करना घंटी बजाना ही धर्म नहीं है धर्म हमें जीवन जीने की कला एवं मार्गदर्शन की शिक्षा प्रदान करता है वही हमारा धर्म है जिससे हमें समाज संस्कृति सभ्यता में किस प्रकार से अपने मानव मूल्यों को समझते हुए समाज, समाज में रहने वाले लोग घर परिवार के साथ हमें बेहतर आचरण अनुशासन मर्यादा का पालन करना धर्म है।
एक शब्दों में यदि हम धर्म को परिभाषित करें तो धर्म हमें यह शिक्षा प्रदान करता है कि जो हमारे लिए अनुकूल नहीं है हमारे लिए अच्छा नहीं है वह व्यवहार हमें दूसरों के लिए समाज के लिए भी नहीं करना चाहिए जिस प्रकार से हम अपना अच्छा सोचते हैं अपने परिवार के लिए अच्छा सोचते हैं उसी प्रकार से हमें संपूर्ण मानव के साथ भी अपनी सकारात्मक सोच को बनाए रखना ही धर्म है।

Related posts

राजस्थान:मुख्यमंत्री ने लंदन में वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल से की मुलाकात, ‘राजस्थान की प्रगति में भागीदार’ बनने के लिए किया आमंत्रित।

rktvnews

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आचार्य श्री 108 शांतिसागर महाराज की श्रवणबेलगोला यात्रा के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया और कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में आचार्य जी की प्रतिमा का अनावरण किया।

rktvnews

नारनौल:अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर वन विभाग की ओर से बड़कोदा में लगाए 550 पौधे।

rktvnews

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एशियाई तीरंदाजी चैंपियनशिप 2025 में अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए भारतीय तीरंदाजी टीम को बधाई दी।

rktvnews

चतरा:झारखंड@25 : अनंत संभावनाओं की ओर।

rktvnews

जयपुर का 297वां स्थापना दिवस: उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने दीपदान एवं रौशनी कार्यक्रम में लिया भाग।

rktvnews

Leave a Comment