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भोपाल: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के जन्मशताब्दी वर्ष पर आयोजित महोत्सव का समापन।

भोपाल/मध्यप्रदेश ( मनोज कुमार प्रसाद)04 दिसंबर।भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी वर्ष, पुण्य स्मरण का द्वितीय दिवस कार्यक्रम, नृत्यधाम संस्था, भुवनेश्वर संस्था द्वारा संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से आज रवीन्द्र भवन भोपाल में गरिमापूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता खेमसिंह डेहरिया,सभापति निजी विश्व विद्यालय विनियामक आयोग म. प्र.ने की।
मुख्य अतिथि विधायक भगवान दास सबनानी, विशिष्ट अतिथि द्वय निराला सृजनपीठ की निदेशक डा. साधना बलवटे, उर्दू साहित्य अकादमी की निदेशक डा. नुसरत मेंहदी एवम सारस्वत अतिथि गोकुल सोनी एवम आलोक चौबे भी मंचासीन रहे।
मां सरस्वती के समक्ष द्वीप प्रज्वलन पश्चात शुभाश्री पटनाइक द्वारा स्वागत उद्बोधन से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
अपने कार्यक्रम में नवभारत की संकल्पना विषय पर अध्यक्षीय उदबोधन में प्रो. खेमसिंह डेहरिया ने अटलजी की राष्ट्रीय चेतना के भाव पर बोलते हुए कहा कि उनके जीवन के जितने भी पक्ष हैं जैसे उनका साहित्य, उनकी, राजनीति, उनकी कला प्रियता, उनकी समाजसेवा सभी का केंद्रीय भाव राष्ट्रचेतना होता था।
प्रधानमंत्री रहते हुए उनके समय किए गए सफल परमाणु परीक्षण से भारत का मस्तक ऊंचा हुआ है।
विशिष्ट अतिथियों में डॉ. साधना बलवटे ने अपने उद्बोधन में कहा कि विवेकानंद के बाद वे पहले ऐसे राजनेता थे जिन्होंने गर्व से कहा “रग रग हिंदू मेरा परिचय”। वे एक ऐसे सितारे थे जिन्हें स्मृति के ब्लैक होल में नहीं डाला जा सकता। ऐसे व्यक्ति “थे” नहीं होते, “हैं” होते हैं, स्मृतियों में चिरजीवी होते हैं, अमर होते हैं।
डॉ. नुसरत मेहंदी ने कहा कि अटल जी अपने आप में एक संस्था थे। अटल जी की राजनीति में करुणा एवम संवेदना का समावेश था। कविता कोमल बनाती है, राजनीति दृढ़ वाजपेई जी में इन दोनों गुणों का अद्भुत समन्वय था।
सारस्वत अतिथि गोकुल सोनी ने कहा कि अटल जी की प्रतिभा बहु आयामी थी। वो जो कुछ कहते थे वह उनके आचरण में दर्शित होता था। कभी उनपर विद्वेष पूर्ण अनर्गल आरोप लगाए गए तब उन्होंने बगैर विचलित हुए तर्कपूर्ण ढंग से उन आरोपों का विन्दुवार खंडन करके कुचक्र के जाल को छिन्न भिन्न किया। वे एक सहृदय पर सुदृढ़ राजनेता थे।
अटलजी के व्यक्तित्व पर पर वरिष्ठ चित्रकार राज सैनी के संयोजन में स्कूल और महाविद्यालय के छात्र- छात्राओं द्वारा बनाए गए चित्रों की प्रदर्शनी लगाईं गयी। इसमें अटलजी के जीवन, राजनीतिक सफर और विचारधारा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को चित्रों में प्रस्तुत किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में संघ रत्ना बानकर और संघमित्रा तायवाडे ने शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत किया। बुंदेली लोकगायन की प्रस्तुति ऋषि विश्वकर्मा और साथियों ने दी। दीपान्वीता और तनिसा ने समूह नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम के संयोजक सतीश पुरोहित एवं नृत्यधाम संस्था की सचिव डॉ शुभश्री पटनायक ने बताया कि यह आयोजन अटलजी की स्मृतियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि अटलजी भारतीय राजनीति के साथ-साथ साहित्य और संस्कृति की दुनिया में भी अमिट छाप छोड़कर गए हैं] जिन्हें समझना और याद रखना भावी पीढ़ी को विकसित भारत की संकल्पना को पहुंचाना बहुत जरूरी है।

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