
RKTV NEWS/जयपुर(राजस्थान )04 फरवरी। राजस्थान सरकार स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी उद्देश्य से मुख्य सचिव सुधांश पंत की अध्यक्षता में सोमवार को सचिवालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में भारत सरकार के सचिव, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग और महानिदेशक, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद, डॉ. राजीव बहल ने राज्य में स्वास्थ्य से जुड़े शोध, उनके उपयोग और उनकी जरूरतों पर चर्चा की।
बैठक में शिशु मृत्यु दर (एनएमआर) को कम करने के लिए प्रभावी उपायों पर चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने ‘कंगारू मदर केयर’ (केएमसी) को डूंगरपुर जैसे जनजातीय जिलों में लागू करने और बाद में पूरे राज्य में इसे बढ़ाने की जरूरत बताई। यह पद्धति अस्पतालों में शिशु मृत्यु दर को 40 प्रतिशत तक कम करने में सहायक है। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान एंटीनेटल स्टेरॉयड का सही तरीके से उपयोग करने से शिशु की मौत के खतरे को कम किया जा सकता है। बैठक में आईसीएमआर द्वारा प्रस्तुत ‘संकल्प डेटा’ के आधार पर प्रसव से पूर्व शिशु मृत्यु और नवजात मृत्यु दर के ताजा आंकड़ों की भी समीक्षा की गई।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती गायत्री राठौड ने सुझाव दिया कि आॅक्जीलरी नर्स मिडवाइफ (एएनएम) को गर्भावस्था और प्रसव की जटिलताओं को पहचानने और इनका सुरक्षित समाधान करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने नवजात गहन चिकित्सा इकाइयों (एनबीएसयू) को बेहतर बनाने और प्रथम रेफरल इकाइयों (एफआरयू) में सिजेरियन ऑपरेशन की सुविधाएं बढ़ाने पर भी जोर दिया।
बैठक में चर्चा हुई कि विद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने वाले बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को कैसे बेहतर बनाया जाए और आत्महत्या के बढ़ते मामलों को कैसे रोका जाए। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि कोटा जिले में यह योजना विशेष रूप से लागू की जाए और इसमें कोचिंग संस्थानों की भी सहभागिता की जाए। इसके लिए जिला कलेक्टर को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए और एम्स जोधपुर को भी इस अभियान में जोड़ा जाए।
बैठक में विद्यालयों और कॉलेजों में काउंसलर की व्यवस्था, शिक्षकों को इस विषय पर विशेष प्रशिक्षण, टेलीमानस हेल्पलाइन, विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े डर और झिझक को दूर करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम, आत्महत्या रोकथाम के लिए अब तक किए गए प्रयासों और भविष्य की चुनौतियों पर भी चर्चा की गई।
बैठक में स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों को और प्रभावी बनाये जाने पर हुई चर्चा। मुख्य सचिव ने कहा कि रिसर्चरस और सरकार के बीच नियमित समीक्षा बैठकें होनी चाहिए ताकि योजनाओं को सही तरीके से लागू किया जा सके। साथ ही ओपीडी सेवाओं, डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कार्मिकों के प्रशिक्षण, ई-संजीवनी डिजिटल हेल्थ सेवाओं, जरूरी दवाओं व उपकरणों की उपलब्धता समय पर सुनिश्चित की जानी चाहिए।
बैठक में टीबी को पूरी तरह खत्म करने के प्रयास तेज करने, स्तन कैंसर की स्टेज-II से पीड़ित मरीजों के लिए विशेष उपचार मॉडल बनाना, गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना और मृत जन्म दर को कम करना, मधुमेह और उच्च रक्तचाप के इलाज को बेहतर बनाना, एनीमिया के इलाज में आयुर्वेद के उपयोग की प्रभावशीलता के अध्ययन, बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने के लिए बेहतर टेक-होम फूड योजना तैयार करना जैसे कई अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रम को बेहतर तरीके से लागू करने पर चर्चा हुई ।
बैठक में आईसीएमआर, केन्द्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, खाद्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
