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पटना : एसआरपी कॉलेज में स्वामी विवेकानंद की जयंती आयोजित।

स्वामी विवेकानंद की जयंती पर एसआरपी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम

पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा)12 जनवरी। पटना के फतेहपुर स्थित एस आर पी कॉलेज के सेमिनार हॉल में स्वामी विवेकानंद का जयंती आयोजित की गई। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. राजेन्द्र प्रसाद राय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी की युक्ति “उठो, जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक रुको मत” आज भी प्रसांगिक है। हमे ऐसी शिक्षा चाहिए, जिससे चरित्र बने, मानसिक विकास हो, बुद्धि का विकास हो और मनुष्य अपने पैरों पर खड़ा हो सके। जिस शिक्षा से मनुष्य की इच्छाशक्ति बढे एवं फलदाई बने उसी का नाम है शिक्षा। कॉलेज के प्राचार्य प्रो अजय कुमार ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द जी ने युवा वर्ग को चरित्र निर्माण के पांच सूत्र दिए। आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता, आत्मज्ञान, आत्मसंयम और आत्मत्याग। इन्हीं पांच तत्वों के अनुशीलन से व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरता है जो समाज और देश का पुनर्निमाण कर सकता है। मंच संचालन करते हुए वरीय शिक्षक प्रो लक्ष्मण कुमार ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में हुआ था। इनके बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ था। इनके पिता श्री विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाईकोर्ट के एक प्रसिद्ध वकील थे। उनके पिता पाश्चात्य सभ्यता में विश्वास रखते थे। वे अपने पुत्र नरेन्द्र को भी अँग्रेजी पढ़ाकर पाश्चात्य सभ्यता के ढर्रे पर चलाना चाहते थे। इनकी माता श्रीमती भुवनेश्वरी देवी धार्मिक विचारों मे विश्वास करने वाली महिला थीं। उनका अधिकांश समय भगवान् शिव की पूजा-अर्चना में व्यतीत होता था। नरेन्द्र बचपन से तीव्र और कुशाग्र बुद्धि के थे। परमात्मा को पाने की प्रबल लालसा के कारण वे पहले ‘ब्रह्म समाज’ में गये। परन्तु वहाँ उनके चित्त को सन्तोष नहीं हुआ। वे वेदान्त और योग को पश्चिमी संस्कृति में प्रचलित करने के लिए महत्वपूर्ण योगदान देना चाहते थे। डॉ (प्रो.)रमा शंकर ने कहा कि शिक्षा का अर्थ है उस पूर्णता को व्यक्त करना जो सब मनुष्यों में पहले से विद्यमान है। प्रो पंकज कुमार ने कहा कि जो शिक्षा साधारण व्यक्ति को जीवन-संग्राम में समर्थ नहीं बना सकती, जो मनुष्य में चरित्र-बल, परहित भावना तथा सिंह के समान साहस नहीं ला सकती, वह कोई शिक्षा नही है। शिक्षा जो व्यक्ति को अपने पैरों पर खड़ा कर दे, वही है शिक्षा। मोहित कुमार ने कहा कि आत्मा ही गुरु है। मनुष्य को अपने अंदर झांकना होगा। इस मौके पर उपस्थित शिक्षकगण पंकज कुमार, बबिता कुमारी, अर्चना सिन्हा, सुमित कुमार, गुंजन कुमार दास, अजीत कुमार, सुधीर कुमार वर्मा, शशि कुमार, मोहित कुमार ने अपने अपने विचार रखे। इस अवसर पर सभी लोगों ने स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किया।

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