कलाकार कभी मरता नहीं:शमशाद प्रेम
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)08 जनवरी।हरदिल अजीज गायक मो.रफी के जन्म शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में नागरी प्रचारिणी सभागार में प्रेम का सुसाज संस्था के बैनर तले कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें आरा, बक्सर और डाल्टेनगंज, झारखंड के कलाकारों ने मो.रफी और उनके साथ गाए 100 गानों को प्रस्तुत किया और जन्म जयंती शताब्दी समारोह को ऐतिहासिक बनाया।साथ ही मो.रफी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर आधारित सवालों के जवाब देने वालों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन गायक धर्मेन्द्र कुमार, शिक्षक रमेश कुमार, गायक मो. रफी, राजकुमार, गायिका सुनीता पांडेय और संगीत प्रेमी इकबाल इल्मी ने दीप जलाकर और मो.रफी की तस्वीर पर माल्यार्पण कर किया। तदोपरांत धर्मेन्द्र कुमार और रजनी शाक्या ने
सौ साल पहले मुझे तुमसे प्यार था…गीत को गाकर कार्यक्रम का शानदार आगाज किया। तदोपरांत राजाराम शर्मा ने नाचे मन मोरा मग्न…, डा.अमित जयसवाल ने तू कहां ये बता ये बता इस नशीली रात में…, मो.नौशाद ने एक न एक दिन कहानी…., सबीना अंसारी ने ऐ फूलों की रानी बहारों की मलिका…., कुमार अनुपम ने ये चांद सा रोशन चेहरा…., मो.रफी ने खुदा भी आसमां से जब जमीं…, अलका शरण ने न झटको जुल्फ से पानी…, अंबे शरण ने बाबुल की दुआएं लेती जा…, सृष्टि ने मधुबन में राधिका नाचे रे…गीत को प्रस्तुतु क्रिया। वहीं राजकुमार व आरती मौर्या ने छुप गए सारे नजारे ओय य क्या बात….रमेश कुमार व सृष्टि ने झि लमिल सितारों का आंगन होगा…, धर्मेन्द्र कुमार व संजना सिह ने बेखुदी में सनम उठ गए…, शमशाद ‘प्रेम’ व सरगम ने साथियां नहीं जाना कि दिल न लगे…, नवीन कुमार व सुनीता पांडेय ये परदा हटा दो ये मुखड़ा दिखा दो…, रमेश कुमार व मो. नौशाद ने सात अजूबे इस दुनिया मे… गानों को बखूबी प्रस्तुत किया।
संयोजक शमशाद प्रेम ने कहा कि मो. रफी साहब एक अच्छे फनकार ही नहीं बल्कि एक अच्छा इंसान भी थे जिनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। कलाकार सदा अमर रहता है।मंच संचालन रेड क्रास की सचिव डा.विभा कुमारी और कार्यक्रम के संयोजक शमशाद ‘प्रेम’ ने किया। कार्यक्रम के अंत में इस आयेजन से जुड़े शिक्षक सह गायक मो.मनव्वर अंसारी के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।सम्मानित किये गए कलाकार को सम्मान पत्र, अंग वस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया जिसमें सुनीता पांडेय और गायक धर्मेन्द्र कुमार रहे।जन्म शताब्दी को यादगार बनाने के लिए शहर के विभिन्न हिस्से में 100 पौधे लगाए गए।

