
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)03 जनवरी। आए दिन परीक्षाओं के हो रहे पेपर लीक और इसके विरोध में छात्रों की उठ रही आवाजों पर छात्र नेता भुवन पांडे ने अपने विचार साझा करते कहा है की पूरी दुनिया नए साल के जश्न में डूबी हुई है पर बिहार में बीपीएससी के छात्र अपने हक की लड़ाई के लिए पुलिस का डंडा खा रहे हैं। कड़ाके ठंड में सरकार उन पर पानी का बौछार कर रही है। ये वे छात्र हैं जो गांव के तंग गलियों से लेकर शहर के लौज,से लेकर फुटपाथ तक कंपकंपाती ठंड,बदन जलाने वाला धूप व वारिस में किसी प्रकार माता-पिता के उम्मीद को साकार करने के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं।कुछ अच्छा करने का जज्बा है। अपने बच्चों का सुंदर भविष्य के लिए कितनों की मां ने गहने बेची,बाप ने खेत गिरवी रख दी,अपने न कपड़ा पहनने की सुधि है न मां को भूखे-प्यासे रहने की चिंता बस एक ही इच्छा है मेरा लाल किसी प्रकार पढ़-लिखकर अच्छा बन जाय,बूढ़े मां बाप को विश्वास हो जाय की की मेरा बेटा सहारा बन गया तो चैन से अंतिम सांस ले। लेकिन न जाने क्यों राजनीतिज्ञ, मंत्री और नेता पद हासिल होते ही यह सब बातें भूल जाते हैं ।अपनी दुनिया और सोच अलग बना लेते हैं।क्या इनको देहात की आर्थिक फटेहाली, छात्र-छात्राओं की परेशानी,पारिवारिक विवशतापरीक्षा पर परीक्षा आदि याद नहीं?पर जब खबर आती है कि पेपर लीक हो गया है तब सारी उम्मीदें टूट जाती है,और जीवन अंधकारमय हो जाता है। ग़म को नहीं बर्दास्त करने वाले दुनिया छोड़ देते हैं।इसका जिम्मेदार कौन है।आए दिन हर एक एग्जाम का पेपर लीक होता है और हजारों छात्रों का सपना टूट जाता है बीपीएससी जैसे बड़े आयोग से ऐसा गैर जिम्मेदाराना काम की उम्मीद कौन कर सकता है लेकिन ऐसा ही हो रहा है।डॉ राम मनोहर लोहिया का एक पंक्ति मुझे याद आ रही है – जब जब सड़के सूनी हो जाती है, तो सदन आवारा हो जाता है, हम उस आवारे हुए सदन में अपनी आवाज पहुंचाना चाहते हैं। छात्र भी अपना आवाज सदन तक पहुंचाना चाहते हैं,सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं और अन्याय के विरुद्ध न्याय का मांग कर रहे हैं इसी इंसाफ के उम्मीद में पटना के सड़को पर ठंड में ठिठुर रहे है।
