नाउसी ने एक लाख रूपये से ऊपर की गर्म कपड़ों की बिक्री की।
उत्तर प्रदेश की रहनुमा ने अपने कढ़ाई की कारीगरी से निर्मित परिधानों की 2 लाख से ऊपर की बिक्री की।
लोग देशी व्यंजन के स्वाद का ले रहे लुफ्त।
दैनिक जागरण ने “लुटेरा ऑनलाइन कार्यक्रम” के तहत किया जागरूक।
12 दिनो में जीविका दीदियों का व्यवसाय का आंकड़ा कर गया 15 करोड़ पार।
RKTV NEWS/ पटना(बिहार)24 दिसंबर।जीविका द्वारा आयोजित बिहार सरस मेला अब समापन की ओर अग्रसर है।12 दिसंबर से प्रारंभ हुए सरस मेला का समापन 26 दिसंबर (गुरुवार) को होना है।लिहाजा आगंतुक अपने पसंद एवं जरुरत की हर वस्तु, परिधान, सजावट के सामान , फर्नीचर और व्यंजन आदि की जमकर खरीददारी कर रहे हैं।सरस मेला में आगंतुकों की बढती संख्या इस बात का भी प्रमाण है कि लोग अपने पुराने दौर में लौट रहे हैं।मेला में शिल्प की खरीददारी में उत्तरोत्तर वृद्धि यह भी दर्शाती है कि आधुनिकता के वर्तमान दौर में ग्रामीण शिल्प और देशी व्यंजनों का क्रेज फिर से बढ़ रहा है।दादा- परदादा के ज़माने के शिल्प, उत्पाद एवं व्यंजन को देख लोग हर्षित हैं और अपने बच्चों को भी बता रहे हैं कि देखो ये कभी हमारे यहाँ हुआ करता था या फिर दादी चने की साग और बाजरे की रोटी बना कर हमें खिलाती थी। सरस रसोई में लोग देशी व्यजनो के प्रति लोगों का आकर्षण यह भी प्रदर्शित कर रहा है कि लोग अब देशी व्यंजनों का लुत्फ़ उठाकर अपना और अपने बच्चों का स्वाद बदल रहे हैं।सरस मेला परिसर स्वाद,संस्कृति , परम्परा एवं शिल्प के आदान-प्रदान का केंद्र बना हुआ है।बिहार समेत 25 राज्यों की सहभगिता भारत देश की संस्कृति एवं परंपरा की नाज़िर पेश कर रही है l खुबसूरत कलाकृतियाँ और देशी व्यंजन देश की खूबसूरती को बयां कर रही है।
जीविका दीदियों द्वारा संचालित दीदी की रसोई में युवा पीढ़ी का देशी व्यंजनों के प्रति क्रेज देखते ही बन रहा है। दही बड़ा और चुडा –दही युवाओं को खूब भा रहा है ।समूह में नवयुवक – युवतियां आ रहे हैं और देशी व्यंजनों का स्वाद ले रहे हैं l
बिहार के हस्तशिल्प और व्यंजन अन्य प्रदेशों से आई हुई स्वयं सहायता समूह से जुडी महिला उद्यमियों को भी आकर्षित कर रहे हैं।मणिपुर के इम्फाल से श्रीमती नाउसा दूसरी बार बिहार सरस मेला में आई हैं।नाउसा गर्म कपडे यथा साल, स्वेटर, टोपी, स्टाल आदि की बिक्री कर रही हैं साथ ही अपने प्रदेश की शिल्प से लोगों को अवगत करा रही हैं l 12 दिनों में उन्होंने 1 लाख रुपये से अधिक की बिक्री की है। नाउसा बिहार मे मिले मान-सम्मान से काफी खुश हैं l नाउसा को बिहार और बिहारीपन काफी पसंद है।वो बताती हैं कि बिहार के लोग काफी तहजीब से बात करते हैं और काफी सम्मान देते हैं l नाउसा बिहार की सिक्की कला को मणिपुर में भी स्थापित करना चाहती हैं। उन्हें सिक्की और बांस से बने उत्पाद काफी पसंद है।इसी तरह आगरा, उत्तर प्रदेश से आई रहनुमा भी बिहार सरस मेला में आकर काफी उत्साहित हैं।उन्हें बिहारी व्यंजन काफी पसंद है।बिहार की मधुबनी कला से रहनुमा प्रभावित हैं और आगरा में भी इसे व्यवसाय के तौर पर शुरू करना चाहती हैं।रहनुमा एम्ब्रायडरी वर्क के अंतर्गत बने पर्स, टॉप , सूट , गाउन आदि की बिक्री कर रही हैं। 12 दिनों में उन्होंने लगभग 2 लाख रुपये के उत्पादों एवं परिधानों की बिक्री की है।रहनुमा बताती हैं कि हस्तशिल्प के लिए बिहार सरस मेला बड़ा बाज़ार है।वह बार-बार बिहार आना चाहती हैं l
12 दिनों में खरीद-बिक्री का आंकड़ा 15 करोड़ 37 लाख पार कर गया है l सोमवार को लगभग 1 करोड़ 37 लाख रुपये के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई l मंगलवार को सवा लाख से अधिक लोग आये।
25 दिसंबर को बड़े पैमाने पर आगंतुक आयेंगे इसके लिए व्यापक तैयारी जीविका द्वारा की गई है l
फन ज़ोन, फ़ूड ज़ोन, सेल्फी ज़ोन, पालना घर भी आकर्षण के केंद्र बने हुए हैं।ग्राहक सेवा केन्द्र से रुपये की जमा-निकासी हो रही है l कैशलेश खरीददारी खरीद-बिक्री को बढ़ावा दे रही है।
मुख्य सांस्कृतिक मंच पर अपर्च्युनिटी फार आर्ट एंड क्राफ्ट के रंग कलाकारों द्वारा कत्थक, झिझिया, कजरी एवं एकल नृत्य की प्रस्तुति की गई।“कईसे खेले जईबू सावन में कजरिया एवं ठुमरी” आदि की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को झुमाया। आरती, चांदनी, भारती, कुसुम, खुशबु और श्वेता समेत कई बाल कलाकारों ने अपने गीत और नृत्य से समां बाँधा।बाल कलाकारों के अभिभावकों के अनुसार लोक नृत्य एवं संस्कृति को प्रोत्साहन देने के लिए एवं बच्चों की प्रस्तुतियों के लिए शानदार एवं सम्मानजनक मंच है।मंच संचालन नाज़िश बानो, राज्य परियोजना प्रबंधक,जीविका , विट्ठल नाथ सूर्य एवं गुलाम सिमनानी ने किया।सांस्कृतिक कार्यक्रम की संयोजक आशा – परियोजना प्रबंधक, जीविका हैं l दैनिक जागरण समाचार-पत्र के द्वारा “लुटेरा ऑनलाई”न कार्यक्रम के तहत आगंतुकों को ऑनलाईन ठगी के प्रति जागरूक किया गया।







