
जलवायु परिवर्तन और नई तकनीकों को समाहित करते हुए बिहार में आपदा जोखिम न्यूनीकरण रोडमैप के अद्यतन संस्करण पर हुई चर्चा।
RKTV NEWS/पटना(बिहार)19 दिसंबर।बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सभागार में बृहस्पतिवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आपदा जोखिम न्यूनीकरण रोडमैप 2015-30 को अद्यतन करने पर चर्चा की गई। बैठक का उद्देश्य वर्तमान समय में प्रौद्योगिकी और तकनीकी दृष्टिकोण के उपयोग और पर्यावरण के सापेक्ष रोडमैप को अपडेट करना था।
यह बैठक प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. उदयकांत की अध्यक्षता में, सदस्य पी.एन. राय, कौशल किशोर मिश्र और प्रकाश कुमार के मार्गदर्शन में हाइब्रिड मोड में आयोजित की गई। बैठक में बिहार डीआरआर रोडमैप का द्वितीय संस्करण को अंतिम रूप देने हेतु देशभर से लगभग 15 विशेषज्ञों ने अपनी राय साझा की।
विशेषज्ञों ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए रोडमैप की वर्तमान स्थिति एवं प्राधिकरण द्वारा तैयार किए गए अद्यतन संस्करण पर अपने सुझाव दिए। रोडमैप में आगामी 2030 एवं उससे आगे के लिए नई कार्य योजना की रूपरेखा तैयार की गई है और इसके क्रियान्वयन तथा मूल्यांकन पर बल दिया गया है। साथ ही आपदा सूचना प्रणाली, जिला और शहरी आपदा प्रबंधन योजना, तथा सरकारी विभागों को आपदा जोखिम न्यूनीकरण रोडमैप के कार्यों के तय समयावधि में कार्यान्वयन के लिए भी विचार-विमर्श हुआ। बैठक में जलवायु परिवर्तन और तकनीकी दृष्टिकोणों जैसे एआर/वीआर को भी समावेश करने का निर्णय लिया गया। इस बैठक में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया कि रोडमैप का क्रियान्वयन व्यवस्थित और प्रभावी तरीके से किया जाए, और इसे समाज के अंतिम वर्ग तक पहुँचाया जाए।
डीआरआर रोडमैप, जो 2015-16 में प्राधिकरण द्वारा तैयार किया गया था, में कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं का समावेश नहीं किया गया था, जिन्हें नए संस्करण में शामिल किया गया है। उदाहरण स्वरूप, 2019-20 में कोविड-19 महामारी ने राज्य ही नहीं, पूरे विश्व के जनमानस को प्रभावित किया, जो पिछले रोडमैप में नहीं था। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने, समावेशी बनाने, और एक सतत विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है। साथ ही, मशीन लर्निंग, एआर/वीआर तकनीकों, स्पेस टेक्नोलॉजी, अर्ली वार्निंग सिस्टम, और पूर्व चेतावनी जैसी तकनीकों के सुदृढ़ीकरण पर बल दिया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक समय पर सूचना पहुँचाई जा सके और समय पर आपदा प्रबंधन कार्यों का क्रियान्वयन किया जा सके।
प्राधिकरण के उपाध्यक्ष महोदय ने कहा कि डीआरआर रोडमैप 2015 अंग्रेजी में था, जिससे उसकी पठनीयता सरल शब्दों में नहीं थी। इसलिए, नए संस्करण को हिंदी में तैयार किया जाएगा, जो सरल भाषा में होगा। साथ ही, प्रत्येक विभाग के लिए अलग-अलग पतली पुस्तकों के रूप में भी इसे तैयार किया जाएगा।
उन्होंने आपदा जोखिम न्यूनीकरण रोडमैप में तकनीकी दृष्टिकोणों के उपयोग पर भी बल दिया, जिसमें एआर/वीआर तकनीक, एआई/एमएल का उपयोग और स्पेस टेक्नोलॉजी का समावेश किया जाएगा। उन्होंने जलवायु परिवर्तन पर चर्चा करते हुए राज्य की प्रमुख आपदाओं, जैसे वज्रपात, कोल्ड वेव, और हीट वेव के प्रभावों को डीआरआर रोडमैप में शामिल किए जाने की जानकारी प्रदान की। साथ ही, उन्होंने कहा कि यह डीआरआर रोडमैप 2030 और उसके बाद की रणनीतियों और मार्गदर्शन पर भी प्रकाश डालता है।
इस अवसर पर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट (एनआईडीएम) के कार्यकारी निदेशक राजेन्द्र रंतु ने बताया कि बिहार राज्य का यह पहल अब अन्य राज्यों को भी अपने आपदा जोखिम न्यूनीकरण रोडमैप तैयार करने के लिए प्रेरित करेगा।
बैठक में प्राधिकरण के सचिव मो. वारिस खान, विशेष सचिव आशुतोष सिंह, विशेष कार्य पदाधिकारी मो. मोइज़ उद्दीन, एनडीएमए के पूर्व सदस्य विनोद मेनन, यूनिसेफ दिल्ली के सरबजीत सिंह सहोता, यूनिसेफ पटना के बी.बी. सरकार और राजीव कुमार, जीपीएसवीएस के सचिव रमेश कुमार सिंह, एचएआई के राजीव झा, यूनिसेफ अहमदाबाद की वंदना चौहान, आईसीएआर-आईआईटी रुड़की के अनिल कुमार गुप्ता सहित प्राधिकरण के पदाधिकारीगण उपस्थित थे।
कार्यक्रम का मंच संचालन वरीय शोध पदाधिकारी दीपक कुमार ने किया और धन्यवाद ज्ञापन सचिव मो. वारिस खान ने किया।
