राज्यपाल ने वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के 6 वें दीक्षांत समारोह को किया संबोधित।
कुलपति द्वारा विश्व विद्यालय के सत्रों को नियमित करने पर जताई प्रसन्नता।
राज्यपाल द्वारा विद्यार्थियों को मेडल किया गया प्रदान।
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)11 दिसंबर।आज वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में 33 वर्षों के इतिहास में 6वां दीक्षांत समारोह भव्यता के साथ वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय प्रशासनिक परिसर में महामहिम कुलाधिपति सह राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ आलेंकर की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि ,सीनेट ,सिंडिकेट, पूर्व व वर्तमान प्राचार्य ,प्रोफेसर, छात्र-छात्र एवं अन्य गणमान्य लोगों से परिसर परंपरागत परिधान,र पर पगडी से सुसज्जित पंक्तिबद्ध भरा रहा।
कुलाधिपति के आगमन पर इनके साथ गेस्ट हाउस से बैंड़ बाजा के साथ सज-धज कर शोभा यात्रा निकली।
इसमें सबसे आगे कुलाधिपति कुलपति कुलसचिव के बाद संकायाध्यक्ष, एकेडमिक काउंसिल सिंडीकेट सिनेटर के सदस्य पंक्तिबद्ध होकर मंच तक आया। उपस्थित जनसमूह खड़ा होकर कुलाधिपति का अभिवादन किया। तत्पश्चात अध्यक्ष की अनुमति से राष्ट्रगान, दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना ,कुलगीत आदि निर्धारित कार्यक्रम संचालित हुए। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन्हें अंगवस्त्र मोमेंटो पेंटिंग आदि देकर सम्मानित किया गया।
स्वागत भाषण कुलपति प्रो शैलेंद्र कुमार चतुर्वेदी ने ढाई वर्षो में अपनी सूझबूझ तथा सबके सहयोग से विश्वविद्यालय के उपलब्धियां को शालीनता से रखा।
जिसमें सत्र का नियमित होना,परीक्षा संचालित एवं परीक्षाफल समय से प्रकाशन, डिग्रियों के लिए परेशानी को समाप्त करना, लगभग दो लाख बीस हजार डिग्रियां ठीक करा विद्यार्थियों को वितरित कराना, 212 प्रमोशन देना जिसमें एक भी आपत्ति नहीं, नेट क्वालीफाई में विश्वविद्यालय एक नंबर पर रहा, शिक्षा के क्षेत्र में अनेक उपलब्धियां रही ।इन्होंने शाहाबाद की चर्चा करते हुए प्रभु राम ,उनके गुरु वशिष्ठ, शाहाबाद की धरती से स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह के साथ-साथ सभी यूजी एवं पीजी में आंतरिक टेस्ट की शुरुआत और सबका रिजल्ट देना हम सबों के लिए सार्थक प्रयास और पहल का नतीजा रहा। कुलपति ने राज्य सरकार और कुलाधिपति के सहयोग की भी सराहना की। सभी पदक धारियों को कुलपति द्वारा एक साथ सत्य और निष्ठा के साथ शपथ दिलाई गई।
राज्यपाल महोदय ने इस अवसर पर सभी युवा छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल देकर उत्साहित किया और उनसे भविष्य के बारे में जानकारियां भी प्राप्त की। दीक्षांत समारोह कराने के लिए कुलपति को बधाई भी दिया। लगभग 2 वर्षो से आया तब से विश्वविद्यालयों पर ध्यान देना शुरू किया तो हर जगह केवल यही सुनने को मिलता था कि शिक्षक नहीं है ,कहीं छात्र नहीं है, कहीं परीक्षा नहीं हो रही है, परीक्षा फल प्रकाशित नहीं हो रहे हैं, सत्र चार पांच साल लेट चल रहे हैं, आदि आदि केवल समस्याएं और चुनौती सुनने को मिलता था। विद्यार्थी यहां से दूसरे प्रदेशों में जा रहे हैं। यह सब विद्यार्थियों का दोष नहीं हमारा दोस्त है इसके लिए हमें प्रयास करना होगा समाधान खोजना होगा।इन्होंने कहा कि यह दीक्षांत समारोह है शिक्षांत समारोह नहीं। मैं भी जहां जाता हूं वहां से कुछ शिक्षा और प्रेरणा लेकर आता हूं।
सिखने की कोई सीमा या मापदंड नहीं है। पूछने पर पता चला की नब्बे प्रतिशत डिग्री धारी केवल नौकरी चाहते है।लेकिन इससे केवल अपने परिवार का कल्याण हो सकता है लेकिन समाज राज्य देश का नहीं। इसके लिए सोच बदलने की,कुछ अलग हटकर करने की जरूरत है। बिहार अब नया करवट ले रहा है, शिक्षा और विश्वविद्यालयों में सुधार हुआ है। सत्र नियमित और परीक्षाएं समय से तथा परीक्षा फल प्रकाशित हो रहे हैं। शिक्षा का माहौल बना है। इन्होंने कहा की युवा नौकरी लेने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बने। इसके लिए बिहार व केन्द्र सरकार की और से अनेक उद्यमी बनने लाभकारी योजनाएं चल रही है। प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग भी दिया जा रहा है।राज्य भवन भी अपने स्तर से एक युवाओं को मार्गदर्शन के लिए उद्यमी सेल बनाने का कार्य चल रहा है जिसमें सभी विश्वविद्यालय में यह सेल बनेंगे ताकि विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन हो सके। जिससे की नौकरी वाली सोच बदलने बदला जा सके। प्रधानमंत्री की योजना विकसित भारत 2047 तक बनाने की है। जिससे देश विकसित कहा जाने लगेगा। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय देश का विकसित और पहला अग्रणी केन्द्र बने ऐसी मेरी भावना है।
कुलसचिव प्रो रणविजय कुमार समय-समय पर सभी उपस्थित गणमान्य लोगों का छात्र-छात्राओं का उत्साह वर्धन अपनी बुलंद आवाज मंच से पहुंचाते रहे। स्वागत गान करने वालों में अंकित श्वेता तृप्ति अंजलि संतोष आदि रहे।
कार्यक्रम जिनके नेतृत्व में संचालित हुआ उसमें कुलसचिव प्रो रणविजय कुमार,प्रो प्रसुंजय कुमार सिन्हा,प्रो लतिका वर्मा,प्रो आभा सिंह,,प्रो धीरेंद्र कुमार सिंह,प्रो अनुज रजक,प्रो नरेन्द्र पालित प्रो अनवारू प्रो गौतम सिंह आदि रहे। मंच संचालन में डा विजय राज कुमावत,डा सुधा निकेतन रजनी द्वारा किया गया।




