
पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 04 दिसम्बर। 03 दिसंबर को पटना के फतेहपुर स्थित एसआरपी कॉलेज में देश के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद की जयंती काॅलेज के प्राचार्य अजय कुमार की अध्यक्षता में मनाई गई ।
प्राचार्य अजय कुमार ने कहा कि राजेंद्र बाबू ने 1952 से 1962 तक भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए और बिहार क्षेत्र के एक प्रमुख नेता थे। वरीय शिक्षक लक्ष्मण कुमार ने कहा कि देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद भारत गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति बने। उनका जन्म सीवान जिले के जीरादेई ग्राम में 3 दिसंबर 1884 को और निधन 28 फरवरी 1963 को पटना में हुआ था। उनकी शिक्षा हथुआ राज से प्रारम्भ हुई। उनके प्रथम गुरु एक मौलवी थे। पूर्व प्राचार्य वैद्यनाथ सिंह ने कहा कि राजेन्द्र बाबू की स्कूली शिक्षा सारण से प्रारम्भ हुई। उन्होंने मैट्रिक पटना के टी के घोष एकेडमी से की। उन्होंने उच्च शिक्षा कलकता यूनिवर्सिटी से प्राप्त की। उन्होंने कहा कि राजेंद्र बाबू की उत्तर पुस्तिका कलकता संग्रहालय में रखी हुई है जिसमें परीक्षक ने लिखा है – “Examinee is better than Examiner”
शशि कुमार ने कहा कि डॉ राजेंद्र प्रसाद के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए और उन्हीं की तरह सादा जीवन उच्च विचार रखना चाहिए। मोहित कुमार ने कहा कि देश के संविधान के निर्माण में डॉ राजेंद्र प्रसाद की अहम भूमिका थी। देश के संविधान को आकार देने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान था। वे संविधान समिति के अध्यक्ष थे। उन्होंने भारत–पाकिस्तान युद्ध और 1962 में चीनी युद्ध सहित मुश्किल वक्त मे देश को संभालने और आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। साथ ही सुधीर कुमार वर्मा ने कहा कि राजेंद्र प्रसाद जी का देश में शिक्षा और सामाजिक सुधार के विकास में अहम योगदान रहा। इस अवसर पर अजय कुमार, लक्ष्मण कुमार, डॉ रमाशंकर, पंकज कुमार, बबिता कुमारी, निशा रश्मि वर्मा, अर्चना सिंहा, अजीत कुमार, सुधीर कुमार, शशि कुमार, मोहित कुमार, दोलन कुमार,अमित कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
