
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)02 दिसंबर।अपना स्वस्थ शरीर ही दुनिया का अमूल्य निधि और सबसे बड़ा सहयोगी है।इसके प्रति सबको जागरूक रहने की जरूरत है खासकर महिलाओं को।वर्तमान समय ठंड का है जिसका प्रभाव हमारे शरीर पर, खासकर कामकाजी महिलाओं पर पड़ता है।महिलाएं किस तरह से बदलते मौसम में स्वस्थ रहे इस
आज प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सविता रूंगटा से राष्ट्रीय सागर के ब्यूरो डा दिनेश प्रसाद सिन्हा ने बातचीत की,जनहित में कुछ अंश प्रकाशित है। डा रूंगटा ने बताया कि
सुबह में ठंडी हवा, दिन में गर्मी, शाम में कुहासा और रात में फिर ठंड,ऐसा मौसम किसी को भी बीमार कर सकता है।इसमें महिलाओं को अपना विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।
महिलाएं स्वभाव वश,लापरवाही से और जब तक लाचार नहीं होती है तब तक का काम करते रहती है।चिकित्सकों के पास जाना जरूरी नहीं समझती है।जिससे साधारण रोग भी लाइलाज की ओर बढ़ जाता है। इन्होंने बताया की सबसे पहले व्यायाम को अपनी दिनचर्या बनाएं और रोजाना कम से कम 30 से 40 मिनट पैदल जरूर चलें।खाने में हरी सब्जी फल सलाद का प्रयोग करें।जूस का सेवन ज्यादा ना करें।तेल घी का उपयोग कम करें और एक गिलास दूध प्रतिदिन ले।बदलते मौसम में मॉइश्चराइजर का उपयोग करना श्रेयस्कर है ।महिलाएं अपने आप को हाइड्रेट करके रखें ।एक बार में एक गिलास और 24 घंटे में 8 से 10 ग्लास पानी पीना चाहिए।
कफ कोल्ड वाले वाले लोगों से थोड़ा दूर रहे । जितना हो सके बीमारियों से थोड़ा बचकर रहें।
बुजुर्ग महिलाओं में कैल्शियम की कमी हो जाती है। दूध का सेवन करें और अलग से कैल्शियम टेबलेट भी ले सकते हैं।महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर और बच्चेदानी के कैंसर की समय-समय पर जांच कराते रहना चाहिए साथ ही अन्य चेकअप भी कराते रहना चाहिए।गर्भवती महिलाओं को इस मौसम में जुकाम फ्लू और संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है।जिसका असर बच्चे पर पड़ता है। असर देखने को मिल सकता है।प्रेगनेंसी में हार्मोनल चेंज की वजह से महिलाएं जल्दी बीमारियों की चपेट में आ सकती है। बदलते मौसम में डेंगू , मलेरिया और टाइफाइड फैलाने वाले मच्छर ज्यादा पैदा होते हैं।हर संभव मच्छरों से बचाव रखें और मच्छरदानी का उपयोग करें।बाहर के स्ट्रीट फूड खाने से बचें । हाथों की स्वच्छता को बनाए रखें।साफ और सूखे कपड़े पहने।गीले कपड़े पहनने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।सूर्य की धूप, विटामिन डी का प्राकृतिक स्रोत है।यथासंभव गुनगुना पानी पीयें और स्नान भी करें। जरा भी असहज महसूस होने पर चिकित्सक से परामर्श आवश्यक ले।
