
RKTV NEWS/पटना ( बिहार)12 नवंबर। क्या भाजपा लोकतंत्र को चला सकती है ! दूसरा प्रश्न यह है कि क्या भाजपा का लोकतंत्र में यक़ीन है ! लोकतंत्र की एक मर्यादा होती है। यह नियम कायदे से चलता है. यह नियम कायदा हमारे संविधान में दर्ज हैं. लेकिन सार्वजनिक तौर पर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हमारे संविधान को मान्यता नहीं देते हैं। उक्त कथनों के साथ अपना बयान साझा करते हुए राजनेता शिवानंद तिवारी ने लिखा है की संविधान के विपरीत ये हमारे देश को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं. यह इनके चरित्र का मूल है।
तत्काल यह लिखने की एक ख़ास वजह है. कल झारखंड विधानसभा का चुनाव है. पर झारखंड जैसे गरीब और पिछड़े राज्य का विकास उनके चुनाव अभियान का मुद्दा नहीं है. वे यहाँ की मूल आबादी को आदिवासी नहीं बल्कि वनवासी कहते हैं. आदिवासी समाज अपने धर्म को हिंदू धर्म से अलग मानते हैं. ये प्रकृति के पूजक हैं. अपने धर्म को ये सरना कहते हैं. इसकी व्याख्या करते हैं कि वे आकृति (मूर्ति)की नहीं प्रकृति की पूजा करते हैं. लेकिन अपने अंध विश्वास के अनुसार प्रधानमंत्री से लेकर भाजपा के तमाम प्रचारक झारखंड चुनाव में बांग्लादेशी घुसपैठिये का शोर मचा रहे. इन लोगों ने भारी शोर मचाया कि वनवासी महिलाओं से शादी कर बांग्लादेशी मुसलमान वनवासियों की ज़मीन क़ब्ज़ा करना चाहते हैं. जबकि झारखंड की सीमा कहीं भी बांग्लादेश देश लगी हुई नहीं है.
झारखंड में मुसलमानों की आबादी 15 प्रतिशत है. ये झारखंड के ग्रामीण इलाक़ों में भी बसे हुए हैं. 1931 की जनगणना में भी यह दर्ज है. बांग्लादेशी मुसलमानों की घुसपैठ का मामला वहाँ के हाईकोर्ट में भी जा चुका है. लेकिन सरकार के पास इसको प्रमाणित करने का कोई आधार नहीं है. यह सच है कि जहाँ तहाँ मुसलमान और आदिवासी महिलाओं के बीच शादियाँ हुईं हैं. लेकिन यह प्रेम विवाह है. जैसा कि देश के अन्य इलाक़ों में होता है.
इस टिप्पणी को तत्काल लिखने की वजह अभी अभी मिली एक खबर से है. कल झारखंड में मतदान होना है.और अभी एक दर्जन से अधिक जगहों पर वहाँ ईडी की छापेमारी हो रही है. इसका मक़सद बताया जा रहा है कि यह छापेमारी बांग्लादेशी मुसलमानों से जुड़े रूपये पैसे के हेर फेर से जुड़ा हुआ है.
क्या इस तरह की कार्रवाई यह प्रमाणित नहीं करती है कि संविधान की रक्षा की शपथ लेकर सरकार में बैठने वाले ही संविधान के लिए गंभीर ख़तरा साबित हो रहे हैं ?
