
हम न रहेंगे सब दिन
स्वर्ग का न देखें स्वप्न हम
निज घर को ही बनायें स्वर्ग हम ।
दुनिया रहेगी सब दिन
हम न रहेंगे सब दिन
फिर क्यों जीयें यहाँ
किसी का दुश्मन बन हम?
फूलों के नहीं
सिर्फ गीत गायें हम
काँटों के भी
गीत गायें हम
क्योंकि फूलों से नहीं
काँटों से रहते सुरक्षित हम।
नेत्र मुकुर से
दिखते नहीं
अंतः के सौंदर्य असौंदर्य
मन मुकुर से दिखते
अंतः के सौंदर्य असौंदर्य।
