
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)09 अक्टूबर।मंगलवार को प्रसिद्ध मनिषी संत युग प्रधान आचार्य जीयरस्वामी जी महाराज के कृपापात्र ब्रह्मपुर पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य आचार्य डॉ धर्मेन्द्र जी महाराज ने कारीसाथ में आयोजित नवदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के षष्ठ दिवस पर अजामिल मोक्षकी कथा कहते हुए कहा कि नारायण के नाम में असीमित शक्ति है,मानव उतना पाप कर ही नहीं सकता , जितना नारायण के एक बार नामोच्चारण में पाप जलाने की शक्ति है। ,,, गजेन्द्र मोक्ष की कथा कहते हुए आचार्य जी ने कहा नारायण की कृपा दृष्टि सभी जीवों पर हैं,पर उन्हें कृपा दृष्टि मिलती है जो उन्हें स्मरण करता है।गज ग्राह की पूर्व जन्म की कथा भी उन्होंने सुनातै हुए कहा कि हमारे वर्तमान कर्म प्राबब्ध बन जाते हैं जो अगले जन्म में अच्छा बुरा कर्म फल जीव भोगना पड़ता है। आचार्य जी सूर्य वंश की विस्तृत रूप से कथा कहते हुए कहा कि सूर्य वंश कथा सनातन का स्वर्णकाल है।इस वंश दाता, धर्म धुरंधर,प्रजापालक, सत्यनिष्ठ, कर्मनिष्ठ ,गोसेवक, एक से एक प्रतापी राजा हुए।इसी वंश में दीलीप महाराज,सत्य हरिश्चन्द्र, सगर, भगीरथ महाराज हुए। भगीरथ महाराज की कथा कहते हुए गंगा अवतरण की दिव्य कथा आचार्य जी ने सुनाते। हुए गंगा को प्रदूषणमुक्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। दिलीप महाराज को गोभक्ति से प्रेरणा लेते हुए गोसेवा पर बल दिया तथा गाय का अर्थ शास्त्र बतलाते हुए गोसेवा को गोविन्द सेवा बतलाया। अम्बरीष जी महाराज की एकादशी व्रत निष्ठा को कहते हुए एकादशी व्रत को वैष्णव की श्रेष्ठ साधना व सिद्धि बतलाई। रघु महाराज,आज और दशरथ महाराज की शासन प्रणाली,सेवसंकल्प, प्रजापालकत्व पर अद्भुत प्रकाश डालते हुए श्रीराम जन्म के हेतु पर प्रकाश डालते हुए श्रीराम की बाल लीला, विवाह लीला , वन लीला, रणलीला ,रामलीला का आध्यात्मिक और व्यावहारिक वर्णन कर भक्तों को गदगद कर दिया। विशेष रूप से फूलवारी व मिथिला प्रसंग में कहा कि वाल्मीकि जी ही तुलसी रुप में प्रकट हुए और जो प्रसंग वाल्मीकि यह रामायण में छूट गया या संक्षिप्त था वह मिथिला प्रसंग था जिसे मानस के बाल कांड में सरस रूप में सुलभ कराया। भक्तों के लिए श्रीसीताराम के पावन लीला को गाकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त किया। मिथिला विशेष रूप से फूलवारी प्रसंग को झांकी के द्वारा प्रस्तुत किया गया जिसे देख भक्त भावविभोर हो उठे, फूलवारी में मालीमालीन, मिथलानियो ,के विविध संवादों का जीवंत वर्णन व दिव्य झांकी का दर्शन हुआ। सीता राम जी का धनुष भंग पश्चात , धनुष का आध्यात्मिक अर्थ करते हुए जयमाल में सीता जी द्वारा माला पहनाने देर क्यों,इस रहस्य का वर्णन कर भक्तों को भक्ति , ज्ञान संबंध को बतलाया गया। ग्रामीण क्षेत्रों से माताओं की टोली पधार कर कथामृत का पान कर रही है। आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में मौर्या होटल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बीडी सिंह उपस्थित हुए और कथा का श्रद्धा पूर्वक श्रवण किया। समिति की ओर से इन्हें अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया
कार्यक्रम व्यवस्था में मेजर राणा प्रताप सिंह ,सुरेंद्र सिंह, बीरबल सिंह ,अशोक सिंह गोरा, डॉक्टर मुन्ना सिंह ,रम्य सिंह, कैलाश सिंह ,जय नारायण सिंह, श्रीनिवास सिंह, रेणुका देवी ,नीलम सिंह ,ब्लू देवी आदि लगे हैं
श्रीमद्भागवत आयोजन समिति आगत भक्तों के लिए प्रसाद भंडारे की माकूल व्यवस्था की है।
