
हे असुर मर्दिनी!
हे असुर मर्दिनी
भूलोक रक्षार्थ
देवलोक सा
फिर करो असुर मर्दन तुम।
असुरों के अत्याचार से
आज भूलोक में भी
सुरलोक सा
मचा है त्राहिमाम
जन जन के संकट में हैं प्राण
तुम्हारे सिवा
कोई नहीं दिख रहा रक्षार्थ।
जैसे देवों का स्वीकार कर अर्ज
असुरों के संहारार्थ
उतरी थी रण में तुम
वैसे जगत की भी
पूजा अर्चना स्वीकार कर
असुर संग संग्राम कर
फिर करो असुर मर्दन तुम।
चहुँओर बहा रहे ये रूधिर
चहुँओर गिरा रहे
काट काटकर तरु सम लाश
इनके अत्याचार से
जन जन कर रहा त्राहि त्राहि
अतः हे असुर मर्दनी
फिर करो असुर मर्दन तुम।
