
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)08 अक्टूबर। सनातन धर्म ध्वज वाहक पू.जीयरस्वामी जी महाराज के कृपापात्र ब्रह्मपुरपीठाधीश्वर जग्दगुरू रामानुजाचार्य विद्या वाचस्पति आचार्य(डाँ)धर्मेन्द्र जी महाराज ने शारदीय नवरात्रि के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर श्रृष्टि विस्तार की कथा कहते हुये बताया की ब्रह्मा जी के तन से मनु शतरूपा का प्राकट्य हुआ।मनु शतरूपा को देवहुति, आकुति ,प्रसुति तीन पुत्रियों की प्राप्ति हुई ओर दो पुत्र प्रियब्रत और उतान पाद।देवहूति कर्दम से विवाहित हुईं जिससे नव पुत्रियाँ की प्राप्ति हुई जिनका विवाह ऋषियों से संपन्न हुआ जिनकी संतान से दुनिया भरीपड़ी है। उतानपाद का विवाह सुनीति और सुरूचि से हुई जिनसे क्रमशःध्रुव और उतम कुमार हुये।ध्रूव प्रतापी राजा हुए ,राज छोडकर साधना कर नारायण को प्राप्त हुए।प्रियब्रत से भी अनूक प्रतापी पुत्र,राजा प्रजा पालक हुए।इसी कुल में ऋषभदेव और भरत महाराज का पदार्पण हुआ जिन्होंने अपने जीवनव्यवहार से सनातन सत्य का आचरण करते हुये नारायण को प्राप्त हुए।मनुपुत्री प्रसुति का विवाह दक्ष से संपन्न हुआ जिनसे क ई पुत्रियों को प्राप्त हुई, छोटी पुत्री सत्ती का विवाह भोलेनाथ शंकरजी हुआ, लेकिन यह विवाह बहत दिनो तक नहीं चल सका।सत्ती को पिता प्रजापति दक्षके घर मे शरीर त्यागने की बाध्यता हो गयी।सत्ती पुनः हिमवान व मैना की पुत्री बनकर धरती पर ओर जगत के कल्याण के लिए नारायण ने देवर्षि नारद की अगुवाई में पार्वती का विवाह शिवजी से संपन्न कराय जिनसे कार्तिक और गणेश दो पुत्र हुए।शिव पार्वती की विवाह की कथा की दिव्य प्रस्तुति आचार्य धर्मेन्द्र ने दी।
इस अवसर पर गणमान्य लोगों को आचार्य धर्मेंद्र तिवारी की ओर से अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया जिसमें सर्वश्री डॉक्टर आदित्य विजय जैन, अखिलानंद ओझा डॉक्टर दिनेश प्रसाद सिंह ,रोशन कुमार आदि रहे। पूरी व्यवस्था में मेजर राणा प्रताप सिंह, सुरेंद्र सिंह, बीरबल सिंह, अशोक सिंह, डॉक्टर मुन्ना सिंह, राम यश सिंह ,कैलाश सिंह ,जय नारायण सिंह ,श्री निवास सिंह, रेणुका देवी, नीलम सिंह, ब्लू देवी आदि की सकारात्मक भूमिका से भागवत कथा का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो रहा है।
दिल्ली से पधारे रघुनंदन स्वामी झांकी का दिव्य संचालन कर रहे है।विवाह की पारंपरिक गीतो को सुन भक्ति मती माताएं व भक्त झुमते रहे।
