
5 दिन में 1 करोड़ 69 लाख का हुआ शुद्ध व्यापार।

लगभग 2 लाख आगंतुक बने महिला उद्यमियों की सफलता के गवाह।

हरियाणा की राजकुमारी बिलौना पद्धति से निर्मित शुद्ध घी का लाई भंडार।

सहजन का शहद, एलोवेरा और आंवला की मिठाई की बढ़ रही मांग।

पुरानी कलाकृतियों की धरोहर बनी जीविका समूह।

पौष्टिक दहीबड़े और देशी व्यंजन का लोग ले रहे लुफ्त।

युवा युवतियों और महिलाओं को रिझा रहे मनमोहक उत्पाद।
RKTV NEWS/पटना(बिहार)23 सितंबर।सदियों पुरानी हस्तशिल्प, लोक कला, संस्कृति, परंपरा एवं देशी स्वाद के प्रति आम से लेकर खास लोग और बच्चों से लेकर बुजुर्गों के बीच बिहार सरस मेला में देखते ही बन रहा है। बड़ी संख्या में लोग सरस मेला में आ रहे हैं और अपने देश के विभिन्न प्रदेशों के शिल्प, कला, संस्कृति से परिचित हो रहे हैं।वहीँ बुजुर्ग अपने ज़माने के शिल्प और स्वाद को पुन : पुनर्जीवित होते देख भाव- बिभोर हो रहे हैं।
सरस मेला के आयोजन के 5 वें दिन तक 1 करोड़ 68 लाख 53 हजार रुपये के उत्पादों एवं व्यंजनों का व्यवसाय हुआ है।
5 दिन में अनुमानत: 1 लाख 88 हजार लोग आये।
ग्रामीण शिल्प और उद्यमिता को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से बिहार सरस मेला बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति , जीविका द्वारा 18 सितंबर से 27 सितंबर तक आयोजित है।सरस मेला का आयोजन देश की स्वयं सहायता समूहों से जुडी महिला शिल्पकारों द्वारा निर्मित उत्पाद हस्त शिल्प एवं लोक कलाकृतियों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए किया जाता है l
सरस मेला में ग्रामीण परिवेश की महिला उद्यमियों द्वारा सिली गई खादी, सिल्क, मटका, कॉटन, कोशा आदि से बनी साड़ियाँ, सलवार, सूट , नाइटी, फुलकारी, चिकेनकारी जैसे परिधानों की खरीददारी बड़े पैमाने पर हो रही है। वहीँ घर सजाने के लिए हस्तशिल्प, कालीन, रग्स, आराम कुर्सी, लैम्प, झूमर, तोरण , कृत्रिम फूल और गमले की भी खरीद -बिक्री जारी है। बच्चों के खिलौने लट्टू, घिरनी, डमरू, किट-किट, योयो ,डुगडुगी चकरी और नेम प्लेट बड़ी संख्या में बिक रहे हैं।
गर्म कपडे, सूट , स्वेटर , शाल, शूट और स्टॉल भी आकर्षण के खास केंद्र हैं।जीविका दीदी की रसोई समेत अन्य व्यंजनों के स्टॉल पर आगंतुकों देशी व्यंजनों का स्वाद लेते हुए घर के लिए भी विभिन्न प्रकार के अचार, पापड़, दनवरी, अदवरी, सत्तू, मखाना, कतरनी चावल, चुड़ा और गुड़ का रवा जैसे देशी व्यंजन ले जा रहे हैं।प्राकृतिक सूखे फूल, बोनसाई, सेकुलुन ऑक्सीजन, जैविक रस हल्दी और पर्यावरण को शुद्ध रखने वाले पौधे भी आगंतुकों को खूब लुभा रहे हैं।गर्म कपड़ों , हस्तशिल्प एवं बेंत-बॉस आदि से उत्पादों के निर्माण का जीवन प्रदर्शन भी किया जा रहा है।
स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने वाले लोगों के लिए भी मेला खास है।किशोरियों एवं महिलाओं के लिए मायारा सेनेटरी पैड की भी बिक्री हो रही है।यह पैड पर्वावारण अनुकूल, प्राकृतिक सामग्रियों से निर्मित, रसायन मुक्त एवं त्वचा के लिए सुरक्षित है और जीविका दीदियों द्वारा ही निर्मित है।बच्चों के लिए पौष्टिक एवं स्वास्थ्य वर्धक पोषाहार की भी बिक्री हो रही है।पाचन तंत्र को दुरुश्त रखने वाले अलग-अलग फ्लेवर के पाचक की भी मांग खूब है। दही बड़ा का लुत्फ़ लोग खूब ले रहे हैं।वहीँ हरियाणा के सोनीपत जिला से आई राजकुमारी देवी बिलौना पद्धति से बनी शुद्ध घी लेकर आई हैं।शुद्ध घी की खूब बिक्री हो रही है।इसके साथ ही वो अचार, सहजन का शहद, आवंला का मुरब्बा, चुकंदर जैम और चटनी लेकर आई हैं।
इनके द्वारा निर्मित एलोवेरा की मिठाई और आंवला की मिठाई की बड़ी मांग है l अब तक दोनों के सौ से ज्यादा पौकेट बिक्री कर चुकी हैं l पांच दिन में उन्होंने एक लाख से अधिक स्वास्थ्यवर्धक मिठाइयों आदि की बिक्री की हैं। बिहार सरस मेला में राजकुमारी देवी पहली बार आई हैं और बिहार आकर खुश हैं वो हर बार बिहार आना चाहती हैं l राजकुमारी देवी बताती हैं कि बिहार सरस मेला में उन्हें सहयोग और मान-सम्मान मिला है।सरस मेला के आयोजन की व्यवस्था को सराहते हुए उन्होंने बताया कि उनके द्वारा निर्मित उत्पादों की वाजिब कीमत भी मिल रही है।उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनके उत्पादों की अच्छी खासी बिक्री होगी और मान-सम्मान मिलेगा।
ग्रामीण महिला शिल्पकारों द्वारा निर्मित एवं उत्पादित हस्तशिल्प एवं देशी व्यंजनों की जमकर खरीद-बिक्री हो रही है। रविवार को खरीद-बिक्री का आंकड़ा डेढ़ करोड़ पार कर गया l रविवार को 74 लाख 46 हजार से अधिक की राशी के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई है l
खरीद-बिक्री का आंकड़ा स्टॉल धारकों द्वारा लिए गए रिपोर्ट के आधार पर आधारित होता है l
रविवार को 58 हजार से अधिक लोग आये और खरीददारी की l आगंतुकों का यह आंकड़ा ज्ञान भवन में अब तक आयोजित सरस मेला में सर्वाधिक है।
बिहार सरस मेला का समय सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक निर्धारित है और प्रवेश निःशुल्क है।
