
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)09 सितंबर।गणेशोत्सव के अवसर पर श्रीसनातन शक्तिपीठ संस्थानम् तथा सनातन-सुरसरि सेवा न्यास द्वारा आयोजित पूजन समारोह में प्रवचन करते हुए संस्थान के अध्यक्ष आचार्य डॉ भारतभूषण जी महाराज ने कहा कि एक ही परमात्मा सृष्टि का सृजन करते समय ब्रह्मा,पालन करते समय विष्णु, संहार करते समय शिव, निग्रह करते समय शक्ति और अनुग्रह करते समय गणपति का स्वरूप धारण करते हैं। समस्त विघ्नों का विनाश तथा सभी भक्तों की रक्षा भगवान गणपति करते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में तमाम अनुकूलताओं के बावजूद तमाम विघ्न और प्रतिबंध अपेक्षित प्रगति व परिणाम को रोक देते हैं। ऐसे विघ्नकाल में भगवान गणेश की उपासना तत्क्षण सुन्दर परिणाम प्रदान करती है। आचार्य ने कहा कि गणेश जी ऋद्धि सिद्धि और बुद्धि के स्वामी हैं। माता पिता के सबसे बड़े भक्त और माता पिता की शास्त्रोक्त महिमा का प्रकाशन करने वाले हैं गणेश जी। माता पिता की पूजा और परिक्रमा करके वे प्रथम पूज्य बने। किसी भी अनुष्ठान में पहली पूजा गणेश जी की ही होती है। आचार्य ने कहा कि महाराष्ट्र में गणेश जी की पूजा परंपरा से होती है। बंगाल में दुर्गा पूजा, बिहार में सूर्य की पूजा छठ पूजा आदि की तरह महाराष्ट्र और दक्षिण भारत से गणेश पूजा आज पूरे देश में श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। आचार्य ने कहा कि लोकमान्य बालगंगाधर तिलक जी ने स्वतंत्रता संग्राम के समय गणेशोत्सव के द्वारा अध्यात्म और देशभक्ति की अद्भुत लहर उत्पन्न कर दी थी जिसके कारण भारतमाता परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त हो गई थी। उन्होंने सभी लोगों से गणेशोत्सव के द्वारा समाज को निर्विघ्न और समृद्ध बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन कुमार सौरभ, स्वागत भाषण सत्येन्द्र नारायण सिंह, पूजन मधेश्वर नाथ पाण्डेय, भजन राकेश कुमार मिश्र तथा धन्यवाद-ज्ञापन शिवदास सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रो बलिराज ठाकुर,विश्वनाथ दूबे, नर्मदेश्वर उपाध्याय, महेंद्र पांडेय, अमरनाथ तिवारी, डॉ सत्यनारायण उपाध्याय, कृष्णकांत दूबे आदि प्रमुख लोगों ने भगवान गणेश जी की पूजा-अर्चना की।
