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कवक जनित एंजाइम लैकेस की अधस्तर संलिप्तता (सबस्ट्रेट प्रामिस्क्यूइटी) औद्योगिक डाई के प्रवाह को कम करने की क्षमता दर्शाती है

RKTV NEWS/ नयी दिल्ली,19 मार्च। कवक के एक समूह द्वारा उत्पन्न लैकेस नामक एक एंजाइम को विभिन्न प्रकार के उन खतरनाक कार्बनिक रंजकों (डाई) के अणुओं को नष्ट करने में सक्षम पाया गया है जो कपड़ा उद्योग में कपड़े रंगे जाने के बाद नियमित रूप से अपशिष्ट जल प्रवाह में बह जाते हैं। यह देखी गई विशेषता जिसे वैज्ञानिकों ने अधःस्तर संलिप्तता (सबस्ट्रेट प्रामिस्क्यूइटी) कहा है, पर्यावरण को हरा-भरा बनाने के लिए एक प्राकृतिक समाधान के माध्यम से अत्यधिक डाई-प्रदूषित पानी के उपचार के लिए एंजाइम-लेपित कैसेट को डिजाइन करने में गहन रूप से प्रभावी हो सकता है।
लैकेसको अब तक विभिन्न कार्बनिक अणुओं को विखंडित कर सकने की अपनी क्षमता के लिए जाना जाता था। इसलिए वैज्ञानिकों ने कपड़ा उद्योगों से निकलने वाले डाई अपशिष्टों के उपचार/विखंडन के लिए एक तकनीक विकसित करने में इसका उपयोग करने की संभावना देखी।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, एस.एन. बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज (एसएनबीएनसीबीएस), कोलकाता के प्रोफेसर रंजीत विश्वास और डॉ. सुमन चक्रवर्ती की एक संयुक्त टीम ने कुछ मानक डाई अणुओं जैसे मिथाइल ग्रीन, क्रिस्टल वायलेट, थियोफ्लेविन टी, कौमारिन 343 और ब्रिलियंट ब्लू को विखंडित करने में लैकेस की प्रभावकारिता का परीक्षण किया।पराबैंगनी (अल्ट्रावायलेट-यूवी)/दृश्य वर्णक्रम विज्ञान (विज़िबल स्पेक्ट्रोस्कोपी) और कंप्यूटर अनुरूपता (सिमुलेशन) के संयोजन से उन्होंने प्रदर्शित किया कि अलग-अलग गतिकी एवं आवेश (काइनेटिक्स एंड चार्ज), आकृति और आकार में व्यापक भिन्नता वाले कई कार्बनिक डाई अणुओं को एंजाइम लैकेस द्वारा विखंडित किया जा सकता है। कवक के एक समूह द्वारा उत्पन्न लैकेस में दो अलग-अलग ऑक्सीकरण अवस्थाओं में 4 तांबे के परमाणु होते हैं जो अपघटन (रेडॉक्स) प्रतिक्रियाओं के माध्यम से सबस्ट्रेट्स को विखण्डित कर सकते हैं और केवल पानी और कार्बन, नाइट्रोजन और गंधक (सल्फर) के गैर-विषाणु या कम विषैले ऑक्साइड का उत्पादन करते हैं।
कम्प्यूटेशनल मॉडलिंग और सिमुलेशन का उपयोग करते हुए वैज्ञानिकों ने इस अध: स्तरीय संलिप्तता (सब्सट्रेट प्रामिस्क्यूइटी) के पीछे आणविक तापगतिज स्रोत (थर्मोडायनामिक ओरिजिन) और व्याप्त तंत्र को स्पष्ट किया है। आणविक संयोजन (मॉलिक्यूलर डॉकिंग) और आणविक गतिशीलता (मॉलिक्यूलर डायनामिक्स-एमडी) सिमुलेशन अध्ययनों ने पुष्टि की है कि लैकेस की सक्रिय साइट को समाहित करने वाले लूप की गठनात्मक नम्यता (प्लास्टिसिटी) के कारण अलग-अलग आवेश (चार्ज) और आकार वाले डाई अणुओं कीसक्रिय साइट में एक विस्तृत श्रृंखला को समायोजित कर सकती है। बाध्यकारी क्षेत्र का आकार भी अनुकूल रूप से बदल सकता है। विभिन्न प्रकार की अंतःक्रियाओं के बीच आंतरिक निरस्तीकरण बहुत भिन्न अणुओं के लिए लगभग समान बाध्यकारी संबंध की ओर ले जाता है। इस प्रकार लैकेस की यह सब्सट्रेट प्रामिस्क्यूइटी औद्योगिक डाई अपशिष्टों के लिए एक व्यापक- वर्णक्रम वाले विखंडक (डिग्रेडर) के लिए एक महती जैव- तकनीकी क्षमता प्रदान करती है।

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