
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)30 अगस्त। गुरुवार को कृषि विज्ञान केंद्र भोजपुर आरा द्वारा ग्रामीण युवाओं के लिए पांच दिवसीय प्राकृतिक खेती का व्यवसायिक महत्व पर प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ।जो सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ । इसके प्रमुख प्रशिक्षक थे कृषि वैज्ञानिक डॉ.सच्चिदानंद सिंह और कृषि वैज्ञानिक डॉ. राम नरेश थे । प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को प्राकृतिक खेती के लाभ और तकनीकों से अवगत कराना था । कार्यक्रम के दौरान दोनों वैज्ञानिक डॉ. सच्चिदानंद सिंह और डॉ. राम नरेश ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं पर व्याख्यान दिया, जिसमें जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, अग्निअस्त्र, मिट्टी की गुणवत्ता सुधार, और मानव स्वास्थ्य पर पडने वाले प्रभाव के बारे में जानकारी शामिल थी । प्राकृतिक खेती का व्यवसायिकरण हेतु ग्रामीण युवाको को प्रेरित किया गया। प्राकृतिक खेती द्वारा भी परंपरागत कृषि की तुलना में अधिक आमदनी केसे प्राप्त की जाए इस पर विशेष रूप से बल दिया गया । प्रशिक्षण का कार्यक्रम पांच दिनों तक चला, जिसमें तीन दिन बुनियादी सिद्धांतों और तकनीकी जानकारी पर केंद्रित थे, जबकि दो दिनों में व्यावहारिक प्रशिक्षण और फील्ड वर्क पर ध्यान केंद्रित किया गया । युवाओं ने प्रशिक्षण के दौरान प्राकृतिक खेती की विधियों को आत्मसात किया और स्थानीय कृषि पद्धतियों से इसे कैसे जोड़ा जा सकता है, इस पर विचार-विमर्श किया । इस प्रशिक्षण में 56 महिलाएँ और 4 पुरुष प्रतिभागियो ने भाग लिया।कार्यक्रम का समापन सर्टिफिकेट वितरण समारोह के साथ हुआ, जिसमें सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के सफल समापन पर प्रमाण पत्र प्रदान किए गए । डॉ. सच्चिदानंद सिंह और डॉ. राम नरेश ने सभी प्रतिभागियों को उनकी मेहनत और समर्पण के लिए सराहा और उन्हें भविष्य में प्राकृतिक खेती को अपनाने और इसके प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया । कृषि विज्ञान केन्द्र, भोजपुर ने इस प्रशिक्षण के सफल आयोजन पर खुशी जताई और कहा कि इस तरह के कार्यक्रम ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनने और सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने में मदद करेंगे।
