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रांची:मुख्य सचिव एल. खियांग्ते ने किया प्रथम राज्य स्तरीय महिला पुलिस सम्मेलन 2024 का उद्घाटन।

सरकार, महिला पुलिस पदाधिकारियों एवम् कर्मियों की समस्याओं के समाधान के लिए कृतसंकल्पित।

प्राथमिकता के आधार पर नीति निर्धारण ,बुनियादी सुविधाओं एवम् आधारभूत संरचनाओं पर सरकार के द्वारा मिलेगी मदद।

कार्यस्थल पर महिला पुलिस पदाधिकारियों एवम् कर्मियों को मिले बेहतर सुविधा एवम् सुरक्षा।

इस दो दिवसीय सम्मेलन में महिला पुलिस पदाधिकारियों एवम् कर्मियों की सेवा,सुरक्षा एवम् सम्मान के संदर्भ में निर्णय लेने से सरकार को मिलेगी मदद…….एल. खियांग्ते, मुख्य सचिव

RKTV NEWS/रांची (झारखंड)23 अगस्त।मुख्य सचिव एल. खियांग्ते ने कहा कि राज्य सरकार महिला पुलिस पदाधिकारियों एवम् कर्मियों की समस्याओं के समाधान के लिए कृतसंकल्प है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के प्रयास से ही इस दो दिवसीय राज्य स्तरीय महिला पुलिस सम्मेलन 2024 का आयोजन पहली बार किया जा रहा है। इस सम्मेलन में महिला पुलिस कर्मियों के सेवा , सम्मान एवम् सुरक्षा से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की गई । सम्मेलन में उद्घाटन सत्र के उपरांत तकनीकी सत्र भी आयोजित किया गया।
मुख्य सचिव ने कहा कि जो भी निष्कर्ष इस सम्मेलन से निकल कर आयेंगे, सरकार को उन सभी पहलुओं पर काम करने में मदद मिलेगी। वे आज शौर्य सभागार, जैप-1 में आयोजित प्रथम राज्य स्तरीय महिला पुलिस सम्मेलन 2024 का उद्घाटन कर संबोधित कर रहे थे।

महिलाओं के विरुद्ध अपराध कम करने में महिला पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण

मुख्य सचिव एल. खियांग्ते ने कहा कि महिलाओं के विरुद्ध बढ़ रहे अपराध से पूरा समाज चिंतित है । इस वातावरण में आप पुलिसकर्मियों का विशेषकर महिला पुलिसकर्मियों का दायित्व महत्वपूर्ण हो जाता है । महिलाओं के विरुद्ध अपराध पर रोकथाम के लिए महिला पुलिस की भूमिका पर विचार करने की ज़रूरत है। अपराध की सूचना पर तत्परता से कार्रवाई करने की आवश्यकता है। महिला पुलिस पदाधिकारी एवम् कर्मी अनुसंधान एवम् साक्ष्य जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती हैं।

तकनीकी सत्र में विचार विमर्श से समस्याओं के निदान में मिलेगी मदद

मुख्य सचिव एल. खियांग्ते ने कहा कि इस दो दिवसीय सम्मेलन में आयोजित तकनीकी सत्र में वक्ताओं के विचार विमर्श से महिला पुलिस पदाधिकारियों एवम् कर्मियों की समस्याओं के समाधान में जो निष्कर्ष निकल कर आएगा उसे पूरा करने में सरकार को मदद मिलेगी।

राज्य पुलिस बल में महिला पुलिस की भागीदारी ज़्यादा से ज़्यादा हो

मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या अधिक से अधिक हो , इसे बढ़ाने पर इस पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभी राज्य में पूरी पुलिस बल का 5 प्रतिशत ही महिला पुलिस है। बहाली के माध्यम से इसे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

पुलिस कर्मियों के लिए प्रशिक्षण ज़रूरी

मुख्य सचिव ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से पुलिस के प्रशिक्षण में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि इस तरह का प्रशिक्षण केवल महिला पुलिस के लिए न होकर बल्कि पुरुष पुलिस सहकर्मियों के साथ भी प्रशिक्षण होना चाहिये।

वूमेन ट्रैफ़िकिंग को जड़ से समाप्त करना सरकार का उद्देश्य: वंदना डाडेल, प्रधान सचिव, गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग, झारखण्ड

वंदना डाडेल, प्रधान सचिव, गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने कहा कि इस दो दिवसीय राज्य स्तरीय महिला पुलिस सम्मेलन से उनके सेवा, सम्मान एवम् भूमिका का मार्ग प्रशस्त होगा। इस सम्मेलन में आगे की रणनीति पर चिंतन मनन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में नक्सल समस्या एक दो इलाक़ों को छोड़कर समाप्ति पर है। इसके अलावा अन्य समस्याओं को भी देख रहे हैं , जिसमें मादक पदार्थों के सेवन पर रोकथाम है जिसके लिये अभी हाल में ही राज्य सरकार की ओर से व्यापक अभियान चलाया गया था। इसके साथ ही राज्य में वूमेन ट्रैफ़िकिंग भी एक मुद्दा है जिस पर राज्य सरकार का फोकस है । महिला पुलिस के सहयोग से इस समस्या का निराकरण कर सकते हैं।

जल्द ही अब हर पुलिस थाने में होंगी एक महिला पुलिस अधिकारी :अनुराग गुप्ता, महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक, झारखंड

राज्य के महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक अनुराग गुप्ता ने कहा कि जल्द ही अब हर पुलिस थाने में एक महिला पुलिस अधिकारी होंगी । साथ ही शहर के थानों में भी महिला थाना प्रभारी होंगी। इसे लेकर पुलिस विभाग तैयारी कर रहा है। जल्द ही सरकार के स्तर पर इसपर कोई निर्णय लिया जाएगा। एक मेमोरेंडम तैयार कर इस सम्मेलन के समाप्ति पर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के समक्ष रखा जायेगा। उन्होंने कहा कि पुलिस थाने में महिला पुलिस अधिकारी के रहने से किसी भी महिला को अपनी समस्याएं बताने में झिझक नहीं होगी वे खुल कर अपनी बात रख पाएंगी। इस कदम से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।

इस दो दिवसीय राज्य स्तरीय महिला पुलिस सम्मेलन में महिला पुलिस से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर होगा विचार-विमर्श

अपर पुलिस महानिदेशक ( आधु. एवं प्रशि.) सुमन गुप्ता ने स्वागत संबोधन करते हुए कहा कि झारखंड में पहली बार महिला पुलिस सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस दो दिवसीय सम्मेलन में महिला पुलिस की समस्याओं पर , कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा पर, सुविधा पर विचार विमर्श किया जाएगा। सम्मेलन में तकनीकी सत्र का भी आयोजन किया जा रहा है , जिसमें अनुभवों एवम् चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी। महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध की रोकथाम के प्रभावी रणनीतियों पर भी चर्चा की जाएगी ।

कार्यक्रम में विभिन्न विषयों पर दी गई विशेष जानकारी

रंजना अस्थाना ,सदस्य सचिव, झालसा ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए शक्ति ऐप, टोल फ्री नंबर 15100 है जो 24 घंटे कार्यस्थल पर हो रही किसी भी परेशानी के लिए कानूनी सलाह उपलब्ध कराता है।
रंजना अस्थाना ने “कार्यस्थल पर महिला पुलिस पदाधिकारियों की सुरक्षा एवं महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध” विषय पर बोलते हुए कहा कि महिला पुलिस की भूमिका बहुत अहम है। कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई कानून और नीतियां बनाई गई हैं, जैसे कि कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 । यह अधिनियम महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से बचाने के लिए बनाया गया है और इसमें शिकायत दर्ज करने और निवारण की प्रक्रिया भी शामिल है। महिला या उनकी ओर से अधिकृत कोई भी व्यक्ति यौन उत्पीड़न की लिखित शिकायत दर्ज करा सकता है। यदि संगठन में दस से अधिक कर्मचारी हैं तो शिकायत आंतरिक समिति (आईसी) के समक्ष दर्ज की जानी चाहिए। यदि संगठन में दस से कम कर्मचारी हैं ,शिकायत जिला अधिकारी द्वारा गठित स्थानीय समिति (एलसी) के समक्ष दर्ज की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि यौन उत्पीड़न की घटना की तारीख से तीन महीने के भीतर या अंतिम घटना के तीन महीने के भीतर शिकायत दर्ज की जानी चाहिए। इसी प्रकार समिति को शिकायत प्राप्त होने की तिथि से 90 दिनों के भीतर जांच पूरी करनी होती है। हालांकि, यदि वैध कारण हैं, तो समय सीमा को अतिरिक्त अवधि के लिए बढ़ाया जा सकता है, जो 90 दिनों से अधिक नहीं होनी चाहिए। अधिनियम में यह प्रावधान है कि जांच की कार्यवाही तथा इसमें शामिल पक्षों की पहचान गोपनीय रखी जानी चाहिए।
कार्यक्रम में शामिल पुलिस अधिकारियों को उन्होंने कहा कि आप अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें। इसके साथ ही, हमें अपने आत्म-सम्मान और आत्म-रक्षा के प्रति भी सजग रहना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार का शोषण और अत्याचार न हों।
कार्यक्रम में शामिल डॉ अनुराधा वत्स, NGO दीपशिखा, राँची ने “लैंगिक विविधता और समावेशी कार्यस्थल के बीच संबंध पर ज़ोर देना” विषय पर बोलते हुए कहा की पहले हमें समझना है कि विविधता और समावेशन के बीच क्या संबंध है। विविधता और समावेशन दो परस्पर जुड़ी अवधारणाएँ हैं – “विविधता किसी इकाई के प्रतिनिधित्व या संरचना पर केंद्रित होती है।” “समावेशन इस बारे में है कि लोगों के विभिन्न समूहों के योगदान, उपस्थिति और दृष्टिकोण को कितनी अच्छी तरह महत्व दिया जाता है और एक वातावरण में एकीकृत किया जाता है।”
विविधता के विभिन्न रूपों के बीच जटिल तरीकों को समझना एक समावेशी कार्यस्थल बनाने के लिए आवश्यक है जो सभी कर्मचारियों को महत्व देता है और उनका समर्थन करता है। उन्होंने बताया कि किस तरह हर परिस्थिति हर कठिनाइयों से लड़कर सुश्री किरण बेदी, जो अपनी जगह बनाने वाली पहली महिला आईपीएस अधिकारी बनी ,मूलतः पुरुष गढ़ में अपनी एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने तिहाड़ जेल के कैदियों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाये हैं। नई दिल्ली में ऐसे योगदानों से वह भारत की एक स्वतंत्र महिला के प्रतीक के रूप में विकसित हुई हैं। उन्होंने कहा बात करें अगर शिमला की पहली महिला आईपीएस अधिकारी सौम्या साम्बशिवन की जो अपने सख्त अनुशासन और अपने सफल संकल्प के लिए प्रसिद्ध हैं।संजुक्ता पाराशर, असम की आयरन लेडी के नाम से मशहूर संजुक्ता पराशर एक साहसी अधिकारी हैं जिन्होंने 16 उग्रवादियों को मार गिराया था। ऐसे इसलिए कर पाए क्योंकि उन्होंने अपने अंदर की शक्ति को बाहर निकाला और डटकर मुकाबला किया। आप भी विपरीत परिस्थितियों में घबराएं नहीं बल्कि अपनी शक्ति का परिचय दें।

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