
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)06 अगस्त।भोजपुर जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के तत्वावधान में कथा सम्राट प्रेमचंद की 144 वीं जयंती प्रोफेसर बलिराज ठाकुर की अध्यक्षता में प्रो दिवाकर पांडेय के आवास पर मनाई गई।
अध्यक्षीय भाषण में प्रो ठाकुर ने कहा कि प्रेमचंद युग निर्माता साहित्यकार थे, जिनकी आवाज भारत की अजेय जनता की आवाज है। इसलिए प्रेमचंद आज भी हमारे साथ हैं। प्रेमचंद का साहित्य राष्ट्रीय उत्थान का साहित्य है। अपने उद्घाटन भाषण में जगत नंदन सहाय ने प्रेमचंद के विषय में विभिन्न विद्वानों द्वारा व्यक्त किए गए विचारों का उल्लेख किया।पत्रकार गुंजन सिन्हा ने कहा कि गोदान आने वाले युग का प्रतिनिधित्व भी करता है और नए युग का द्वार भी खोलता है।भोजपुरी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर दिवाकर पांडेय ने प्रेमचंद के कथा शिल्प को मोहक बताते हुए कहा की कथा का प्रवाह हमें शंका करने का अवसर नहीं देता। संकीर्ण मानसिकता वाले विरोधियों के आरोपों में कोई दम नहीं है। दर्शनशास्त्र के विद्वान प्रोफेसर महेश सिंह ने कहा कि प्रेमचंद का जीवन दर्शन इसी संसार में जूझने वाले मनुष्यों के सुख-दुख,आशा-निराशा और विजय- पराजय का चित्रण मिलता है। शिवदास सिंह ने प्रेमचंद को अमर कथाकार बताया।राजीव नयन अग्रवाल ने प्रेमचंद की श्रेष्ठ कहानियों की विशेषता पर प्रकाश डाला। डॉ०रेणू मिश्र ने प्रेमचंद पर स्वररचित कविता का पाठ किया। डॉक्टर नंद जी दुबे ने स्वागत करते हुए प्रेमचंद के कथा-संसार पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद महान साहित्यकार थे और मानवता के संदेश वाहक थे। वशिष्ठ मुनि चौधरी,डॉक्टर पंकज कुमार सुधांशु, शशिकांत तिवारी ने भी प्रेमचंद की कलात्मक प्रतिभा पर प्रकाश डाला।संचालन राकेश तिवारी और धन्यवाद ज्ञापन डॉक्टर नंद जी दुबे ने किया।

