
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)29 जुलाई।28.जुलाई को श्रावण समाराधना के अवसर पर श्रीसनातन शक्तिपीठ संस्थानम् तथा सनातन-सुरसरि सेवा न्यास के संयुक्त तत्त्वावधान में श्रीसहदेवगिरि मंदिर कतीरा में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीशिव पुराण कथा के पहले दिन प्रवचन करते हुए आचार्य डॉ भारतभूषण जी महाराज ने कहा कि भगवान शिव वेदमय हैं। उनकी पूजा करलेने से सभी देवताओं, सभी वर्णों,सभी अक्षरों व सभी छन्दों की पूजा हो जाती है। भगवान शिव स्वयं, जगदंबा पार्वती-दुर्गा उनकी शक्ति, गणपति-गणेश उनके पुत्र, सूर्य-चंद्र उनके नेत्र तथा भगवान विष्णु उनके हृदय हैं। एक ही शिव की उपासना से पंचदेवों की उपासना पूर्ण हो जाती है। आचार्य ने कहा कि भगवान शिव की पूजा समस्त इच्छित फल प्रदान कर देती है।रुद्र संहिता पार्वती खंड की कथा कहते हुए आचार्य ने कहा कि जगदंबा पार्वती को ब्राह्मणपत्नियां पातिव्रत्य धर्म का उपदेश करती हैं। स्त्री के लिए पति सर्वोपरि है और पतिव्रता स्त्री ही गृहस्थाश्रम का आधार, धर्म का मूल, संपूर्ण सुखों का मूल तथा वंश परम्परा की वृद्धि का मूल होती है। जहां-जहां पतिव्रता स्त्री के पांव पृथ्वी का स्पर्श करते हैं वहां-वहां की भूमि पापहारिणी तथा परम पावन बन जाती है। इस अवसर पर प्रयागराज से पधारे पं संजय द्विवेदी के नेतृत्व में भगवान साम्बसदाशिव का सपरिकर पूजन एवं रुद्राभिषेक संपन्न कराया गया जिसमें डॉ पी सिंह, माधुरी सिंह, विजय तिवारी, अभिषेक श्रीवास्तव आदि प्रमुख यजमानों ने भाग लिया। मंदिर के पुजारी अजय मिश्र ने बताया कि प्रतिदिन सुबह सात बजे से पूजन एवं रुद्राभिषेक तथा अपराह्न साढ़े तीन बजे से कथा-प्रवचन होगा।
