RK TV News
खबरें
Breaking News

आकाशीय बिजली से बचा जा सकता है :गुफरान अहमद खान

आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)24 जुलाई।बरसात का मौसम चल रहा है ।बारिश के साथ आसमान में चमक, कड़क और तेज आवाज सुनाई पड़ती है,और पता चलता है कि बिजली गिरी और कई लोगों की असामयिक मौत हो गई। एक सप्ताह पूर्व ऐसी ही एक हृदय विदारक घटना भोजपुर आरा के तरारी प्रखंड के बड़कागांव प्लस टू विद्यालय के छात्राओं के साथ घटित हुआ जिसमें 19 छात्राएं झुलस गई।
क्या ऐसी घटनाओं से बचा जा सकता है?
इस संबंध में इंस्टेंट इंजीनियरिंग सॉल्यूशन के संस्थापक और टीम लीडर गुफरान अहमद खान से इस संबंध में जानकारी लेना चाहेंगे। बताते चलें की ये भोजपुर आरा चकिया मुहल्ले के सामाजिक कार्यकर्ता सरफराज अहमद खान के पुत्र हैं।इनकी शिक्षा जैन स्कूल, महाराजा कॉलेज और पटना से एमएसीईटी इंजीनियरिंग की है। उनकी कंपनी फायर एंड सेफ्टी इलेक्ट्रिकल ऑटोमेशन का कार्य राष्ट्रीय स्तर पर करती है।
तड़ित,बिजली,ठनका या लाइटिंग क्या है,कैसे और कहां गिरती है और इससे होने वाले नुकसान से कैसे बचाजा सकता है।
इस प्रश्न के जबाब में इन्होंने बताया की
हवाओं के द्वारा बादलों के टकराने के बाद घर्षण उत्पन्न होने के कारण स्टैटिक करंट उत्पन्न होता है जिसके कारण बादल के निचले सतह पर नेगेटिव चार्ज और ऊपरी सतह पर पॉजिटिव चार्ज उत्पन्न होता है।
इन्होंने बताया कि बिजली गिरने में 10 करोड़ का वोल्टेज होता है,दस हजार एंपियर का करंट फ्लो होता है और सताइस हजार डिग्री सेंटीग्रेड तापमान होता है।
बिजली गिरने की संभावना मोबाइल फोन,टावर , पेड़,खाली मैदान, तालाब, समुद्र,नदी तट विशेष रूप से गिरता है।
एक रिपोर्ट के अनुसार प्रतिवर्ष भारत में दो हजार पांच सौ मौतें होती है।
तड़ित सुरक्षा प्रणाली पर इन्होंने बताया की
लाइटनिंग प्रोटेक्शन सिस्टम में लाइटनिंग रॉड या लाइटनिंग अरेस्टर (एलए) शामिल होता है, जिसे एयर टर्मिनल के रूप में भी जाना जाता है। एक धातु की रॉड जो किसी संरचना या लाइटनिंग मस्तूल पर लगाई जाती है और बिजली की ऊर्जा को जमीन और अर्थिंग में स्थानांतरित करने के लिए लगायी जाती है ताकि संरचना की रक्षा हो। यदि बिजली संरचना से टकराती है, तो यह अधिमानतः छड़ से टकराएगी और संरचना से गुजरने के बजाय तार के माध्यम से जमीन पर ले जाएगी, जहां यह बिजली का झटका या आग का कारण बन सकती है।
उपयोग में दो प्रकार की बिजली सुरक्षा प्रणालियाँ हैं जिसमें पारंपरिक बिजली संरक्षण प्रणाली या फ्रैंकलिन रॉड दूसरा अर्ली स्ट्रीमर एमिशन या ईएसई लाइटनिंग प्रोटेक्शन सिस्टम है ।पारंपरिक बिजली संरक्षण प्रणाली में आईईसी 65302 की सिफारिशों के अनुसार बिजली की छड़ को अर्थिंग से जोड़ने के लिए फ्रैंकलिन रॉड या सामान्य बिजली की छड़, लाइटनिंग मास्ट, एल्यूमीनियम कंडक्टर शामिल हैं और धरती पर बिजली की ऊर्जा को नष्ट करने के लिए अर्थिंग शामिल हैं।
इन्होंने बताया कि बड़े-बड़े औद्योगिक प्लांट, बड़ी-बड़ी सोसाइटी, सरकारी भवनों मे लगा रहता में यह सिस्टम लगा रहता है। लेकिन आज भी शहर और देहात की बहुत से भवनों पर आकाशीय बिजली से बचने के उपाय नहीं किया जा रहे हैं जो सबके लिए खतरा है। इसे लगाकर जान माल की सुरक्षा किया जा सकता है।

Related posts

देहरादून: मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र वितरण के साथ किया 15 करोड़ रुपए से अधिक लागत की विभिन्न विभागीय निर्माण योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास।

rktvnews

“स्क्रीन का शिकंजा: ऑस्ट्रेलिया से सबक लेता भारत?”

rktvnews

भोजपुर: PK जातीय जनगणना और भूमि सर्वे में हुई अनियमितताओं के खिलाफ सीएम नीतीश कुमार के गांव से शुरू करेंगे हस्ताक्षर अभियान, जिला महिला अध्यक्ष ने कहा- करेंगे राज्यव्यापी आंदोलन।

rktvnews

गिरीडीह: सरदार पटेल की 150 वीं जयंती के उपलक्ष्य पर सांसद के नेतृत्व में एकता पदयात्रा का आयोजन।

rktvnews

रायपुर : राज्यपाल ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर उन्हें नमन किया।

rktvnews

चतरा:उपायुक्त ने कृषि विज्ञान केंद्र चतरा का किया निरीक्षण।

rktvnews

Leave a Comment