आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)26 मई। शनिवार को
घुसिया विक्रमगंज रोहतास श्रीमद्भागवत सप्ताह यज्ञ घुसिया में यज्ञ के षष्ट दिवस पर श्रीकृष्ण भगवान के दिव्य लीलाओं का वर्णन करते हुए जीयरस्वामीजी महाराज के कृपापात्र ब्रह्मपुरपीठाधीश्वर विद्या वाचस्पति आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण जी की सभी बाल लीलाओं का अपना हेतु है,एक रहस्य है।पूतनोद्धार,सक्टासूर,बकासुर, अघासुर, ममलार्जुन आदि से जुडी सभी कथाओं का हेतु है,उदेश्य है शिक्षा है। कात्यायनी व्रत की कथा कहते हुए कहा कि जिसे चीरहरण कहा जाता वह चीर की चोरी नहीं ,वरन जीव तथा भगवान के बीच में पड़े पर्दे का उदभेदन है,आकंठ भोग रूपी जल मे डुबे जीवो को बाहर निकालने की कथा है,भगवान की भक्तों पर कृपा की कहानी है।.
.गोवर्द्धन पूजनकी कथा कहते हुए आचार्य जी ने कहा गोवर्धन पूजन की कथा देवराज इन्द्र के अहंकार का दमन,पर्यावरण रक्षा,प्रकृति पूजनकी कहानी है।..नागनाथन की कथा यमुनाजी को परदूषण मुक्ति का संदेश है।.आगे आचार्य जी ने मीट्टी भक्षण व माखन चोरी का आध्यात्मिक व्याख्या प्रस्तुति दी। महारास कथा को कहते हुए कहा कि महारास स्त्री पुरूष का मिलन हीं,वल्कि भक्त और भगवान का मिलन है,भक्तों की मनोकामना को भगवान द्वारा पूरा करना है,त्रेतायुग में मिथलानियों और दन्डकारण्यन के ऋषियों को दिये गये वचन का निर्वहन है । गिरिराज नाम की सारथकता को बतलाते हुए कहा कि यह कथा यह बतलाती है कि इन्द्र का जब अहंकार नहीं रहा तो दुनिया के जी किस खेत की मूली है।अहंकार भगवान का भोजन है ,ब्रह्मा जी का अहंकार व इन्द्र का अहंकार का भगवान ने दमन किया। आज की कथा का उपसंहार करते हुए ज.गु.रा.विद्या वाचस्पति ने कहा कि भगवान मे श्रद्धा व विश्वास होजाते ही बड़ी से विपतियो के पहाड़ को भगवान संकल्प मात्र से टाल देते हैं, भक्तों की रक्षा करते है।…रसमयी कथा की प्रस्तुति भक्तों को बांधी रही, भीषण गर्मी भी उन्हें नहीं हिला सकी। एक तरफ भयंकर लूं लहर का कहर है ,तो दूसरी ओर श्रीमद्भागवत की कथा मृत की लहर ।कल रूकमणि मंगल की कथा होगी जिसकी तैयारी आज से ही चल रही है।
