
‘भइया’ जे भइलैं बहुत बड़ऽ ज्ञानी।
पियावऽताड़ें लोगवा के लगिये से पानी।।
कमवां न धमवां झारेलैं लंतरानी।
पियावऽताड़ें लोगवा के लगिये से पानी।।
पढ़िके बिदेसवा से अइलैं अँग्रेजिया,
भूलि गइलैं जिलवा-जवार, भाषा-बोलिया।
काली माई, डीह बाबा कइसे पुजइहैं,
थनवां पे चढ़ी ना जे लपसी सोहरिया।।
पुरखन कऽ कइसे सँजोहियैं निसानी।
पियावऽताड़ें लोगवा के लगिये से पानी।।
जबसे ले अइलैं सहर से बहुरिया,
घूमि-घूमि बबुआ नचावेलैं पतुरिया।
सास-ससुरवा न अँखिया सोहाला,
धन-दौलतिया पे रहेला नजरिया।।
कोरट-कचहरी में बीतेला जवानी।
पियावऽताड़ें लोगवा के लगिये से पानी।।
खेतवा में जाइके उड़ावेलैं कउआ,
जाइके बजरिया चढ़ावेलैं पउआ।
कनवां में दबले रहेलैं मोबाइल,
घरवां में कवनो ना गइया न चउआ।।
दूधवा के तरसेलैं लइका-परानी।
पियावऽताड़ें लोगवा के लगिये से पानी।।
खेतवा में लउकी अ कोंहड़ा उगावैं,
पेड़वा पे आलू अउरी मुरई फरावैं।
डारिके मसीनियाँ के मुँहवां में अलुवा,
बबुआ जी धड़धड़ सोनवां बनावैं।।
अइसने होई अब, खेतिया-किसानी।
पियावऽताड़ें लोगवा के लगिये से पानी।।
बिना सिर-पैरवा के कथवा सुनावैं,
जनता में दिन-रात झूठ फैलावैं।
पानी अउर बिजुली के बाँटे खैरतिया,
दिनवें सबके सपनवां देखावैं।।
झूठ बोलले में बाटे नाहीं कवनो सानी।
पियावऽताड़ें लोगवा के लगिये से पानी।।
खाली दिन-रतिया करेलैं बद्जुबानी,
मोदी, अम्बानी ई अडानी परेसानी।
बुद्धिया के नदिया में नइखे रवानी,
जाए चूल्हे-भाड़ देस, ओनकर का हानी।।
इहे बाड़ीं, ‘भान’, राजा-रानी के कहानी।
पियावऽताड़ें लोगवा के लगिये से पानी।।
