
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)16 सितंबर। विश्वविद्यालय के शिक्षकों और इसके कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और पारिवारिक पेंशन के भुगतान में शिक्षा विभाग की टाल-मटोल की नीति से क्षुब्द शिक्षक संगठनों फुटाब एवं फुस्टाब ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। यह जानकारी फुटाब के कार्यकारी अध्यक्ष कन्हैया बहादुर सिन्हा एवं महासचिव संजय कुमार सिंह, विधान पार्षद ने दी। इन लोगों ने बताया की शिक्षा विभाग के 11 सितंबर के पत्र का हवाला देते हुए कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए बजटीय अनुदान जारी करने के लिए कोई समय सीमा निर्दिष्ट नहीं की गई है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब मात्र पांच माह शेष हैं। ऐसी स्थिति सरकार के किसी अन्य विभाग में नहीं है।
आरोप लगाया गया है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी इतने अड़ियल हो गये हैं कि 20/6/24 को भुगतान पद्धति पर शिक्षा मंत्री की उपस्थिति में लिए गए नीतिगत निर्णय और विश्वविद्यालयों को सम तिथि पर प्रेषित पत्र में पीएल खाते में पड़ी अवशेष राशि की वापसी के पश्चात हीं अनुदान जारी करने का कोई उल्लेख नहीं होने के बावजूद इसके विपरित आदेश जारी किया जा रहा है । जो बिहार कार्यपालिका नियमावली का प्रत्यक्ष उल्लघंन है। 20/6/24 के बाद निर्गत पत्रों में हिदायत दी गयी है कि जबतक विश्वविद्यालय पी एल एवं अन्य खातों में अवशेष राशि वापस नहीं करते तब तक वेतन, पेंशन, पारिवारिक पेंशन और सेवा निवृत्ति लाभ के साथ साथ अतिथि शिक्षकों के वेतन मद में भी कोई अनुदान इस वित्तीय वर्ष में विमुक्त नहीं किया जाएगा।
स्मार पत्र में कहा गया है कि अनुदान और उसके व्यय का मामला विश्वविद्यालयों और सरकार के बीच का है इसमें विश्वविद्यालय कर्मियों की कोई भूमिका नहीं है।
शिक्षा विभाग अगर अवशेष राशि वापस लेने के प्रति गम्भीर है तो उतनी राशि का समायोजन कर शेष अनुदान विमुक्त कर सकता है लेकिन चूंकि भावना प्रताड़ित करने की है तो रोज नए नए शर्त लगाए जा रहे हैं जिससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है।
फुस्टाब के अध्यक्ष रामजतन सिन्हा एवं महासचिव दिलीप चौधरी ने कहा कि विश्वविद्यालय कर्मियों को अनावश्यक रूप से सड़क पर उतरने के लिए बाध्य किया जा रहा।
उन्होंने बतिया कि 2007 में फुटाब फुस्टाब के संयुक्त प्रतिनिधि मंडल से वार्ता के क्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता विश्वविद्यालय कर्मियों को नियमित वेतन, पेंशन और भविष्य निधि भुगतान की है। मुख्यमंत्री जी अपनी प्रतिबद्धता पर खरे उतरे, लेकिन पिछले कई वर्षों से 2007 से पहले की स्थिति फिर से पैदा हो गई है जिससे शिक्षकों में गंभीर नाराजगी है।
इस अराजक स्थिति को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री से सीधे हस्तक्षेप करने का आग्रह किया गया है।
