
चुनाव है चुनाव!
चुनाव है चुनाव
लगाये सब दाव
ना खाये कोई ताव
बातें करें अच्छी
वादों के पानी में
उतारे सभी नाव
शोर सुने जनता
काम कब बनता
उफ़ ये कागा का
कैसा काँव- काँव
जो शहरों में रहता
वो घुमे गाँव- गाँव
हम हैं मैदान में
जीत के तूफ़ान में
ना रहे कोई गुमान में
जीत कर हम आयेंगे
वादा सब निभायेंगे
बहार फिर लायेंगे
ना आपको भुलायेंगे
जो किया नही कोई
वो करके दिखायेंगे
जुगत भिड़ाये हैं कि-
गले अपनी दाल
सपना ये आँखों में कि-
होंगे मालामाल
दारू मुर्गा …और बँटता पुलाव
धर्म और जाति का जला है अलाव
जमाये सारे पाँव
मिले एक कुर्सी
-कि बने कोई ठाँव
सब से सब मिलते
बातें अपनी कहते
जीतने के बाद
रंग गिरगिट- सा बदलते
ना दिया कोई देंगे
हम सुकून वाला छाँव
भोली इस जनता का
बढ़ा अभी भाव
चुनाव है चुनाव
चुनाव है चुनाव
चुनाव है चुनाव।

