शिवहर/संजय गुप्ता ,03 मई।वर्तमान में संपन्न हो रहे 18वीं लोकसभा के चुनाव दुनिया के सबसे महंगे चुनाव साबित होने वाले हैं। जानकारी देते हुए नगर परिषद के वार्ड पार्षद व जिला इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के सचिव गिरीश नन्दन सिंह “प्रशांत” ने एक विशेष भेंट वार्ता में बताया है।
श्री “प्रशांत” ने बताया है कि इनमें अकेले सरकार को 1.20 लाख करोड़ खर्च हो रहा है ।सात चरणों के मतदान में 97 करोड़ मतदाता मताधिकार का प्रयोग करने वाले हैं। इसके लिए देशभर में 10.5 करोड़ पोलिंग बूथ बनाने के साथ 55 लाख ईवीएम का उपयोग हो रहा है।
वार्ड पार्षद गिरीश नंदन सिंह “प्रशांत” ने बताया है कि चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने में 1.5 करोड़ कर्मचारियों सहित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। लेकिन संपूर्ण आकलन में जनता द्वारा सदस्यों का चुनाव एवं चुने गए सदस्यों की जनता के प्रति जवाब देही में अनदेखी और अनुशासनहीन आचरण विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की परिपक्वता को हास्यास्पद बनता है।
उन्होंने कहा है कि आज की चुनावी माहौल में आरक्षण का मुद्दा चर्चा के केंद्र में है। राहुल गांधी और भाजपा नेताओं की आरक्षण पर बहस बेमानी है। यह कड़वा सच है कि आरक्षण एक बाध्यता है ।जिसको सरकार को लागू करना पड़ता है, कांग्रेस और बीजेपी आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू कराना चाहती है तो कानून बनाकर इस बाध्यता को कानूनी जामा पहनाया जाए।
इतने पैसे खर्च कर लोकसभा सदस्य चुने जाते हैं तो अच्छे लोकसभा सदस्य चुने जाए ताकि सरकार के पैसे व्यर्थ में खर्च ना हो।
