आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)25 अप्रैल।प्रकृति का पारा अप्रैल माह से ही बढ़ते जा रहा है।विगत दिनों से तेज गर्म हवा और कड़ाके की धूप का असर दिखने लगा है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।इसका बड़ा असर चर्म पर पड़ता है।शरीर को ढकने वाला सबसे बड़ा अंग है।जिसके कारण गर्म हवा, पानी, धूप, चोट ,कीटाणु, विषाणु, जलना आदि सबका प्रहार चर्म को ही झेलना पड़ता है।
इसी संदर्भ में डॉक्टर दिनेश प्रसाद सिन्हा ने जनहित में आवश्यक जानकारी हेतु सदर अस्पताल आरा के प्रसिद्ध युवा अनुभवी चर्म रोग विशेषज्ञ डॉक्टर राजीव रंजन से जानकारी प्राप्त की। बताते चले की डा राजीव स्व प्रेम नाथ लाल के पुत्र,स्थाई निवासी अस्पताल रोड आरा है।इनकी प्रारंभिक शिक्षा जैन स्कूल ,स्नातक महाराजा कालेज,तथा एमबीबीएस कलकत्ता विश्वविद्यालय से की है।इन्होंने 2007से 2018 तक सदर अस्पताल में अपनी सेवा दी। इसके बाद अपना रिटायरमेंट लेकर अपने आरा आवास पर ही मेरीजों को देखते हैं।जनपद से लगाव सेवा के प्रति प्रेरित करते रहा।लगभग 5 वर्षों तक रेडक्रॉस सोसायटी में निशुल्क सेवा डा के बी सहाय के दिये, सभी सामाजिक, धार्मिक संस्थान से जुडकर अपनी सेवा देते हैं। इनके नेतृत्व में साईं मंदिर की स्थापना बुढ़वा महादेव मंदिर में किया गया है। महादेवा हनुमान मंदिर, विश्व हिन्दू परिषद, रामलीला समिति, लावारिस सेवा, आइएमए आदि से जुड़े रहे हैं। इन्हें जिला प्रशासन से लेकर राज्य स्तर पर भी कई अवार्ड मिले हैं। जिनमें आईकॉन आफ बिहार का खिताब केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद द्वारा प्राप्त है। उनकी पत्नी डॉक्टर शालिनी सिंहा स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं।इनका भी सामाजिक दायित्व कम नहीं है।ये पूर्व में आईएमए भोजपुर जिला शाखा की सचिव रही है।
डा राजीव से बातचीत के कुछ अंश प्रकाशित किए गए। शरीर पर गर्म हवा, धूप इत्यादि से क्या प्रभाव पड़ते हैं क्या-क्या परेशानियां हो सकती है के जवाब में इन्होंने बताया कि सबसे पहले त्वचा जल जाता है, काला हो जाता है, दाग पड़ जाता है,झुर्रियां, झाइयां,बड़े-बड़े फोड़े, फुंसियां ,सूजन ,खुजली आदि हो जाती है। जो शरीर को येन केन प्रकारेण रोगी बना देती है और पीड़ा पहुंचाने लगती है।पूरा परिवार मरीज की चपेट में आ जाता है।इससे बचाव के लिए सबसे पहले धूप में घर से बाहर नहीं निकले, अगर बहुत जरूरत हो तो शरीर और चेहरे को गमछा, मास्क आदि से पूरी तरह से ढक ले,धूप से बचाव हेतु सन स्क्रीन लोशन का उपयोग करें,धूप चश्मा का भी प्रयोग करें।खाली पेट कभी ना बाहर निकले बल्कि पेट भरा रहे ,जल पीकर निकले, बाहर से आए तो तत्काल चेहरे को ना धोएं।घर में सुरक्षित रहे,शरीर,घर की साफ सफाई पर ध्यान दें, गर्म और संतुलित आहार लें। इसके बाद भी आपको कहीं परेशानी लग रही है तो नजदीकी चिकित्सक से परामर्श ले।


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