
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)22 अप्रैल।21अप्रैल को श्रीराम नवमी महोत्सव पर श्रीसनातन शक्तिपीठ संस्थानम् द्वारा महाराणा प्रताप नगर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन प्रवचन करते हुए प्रख्यात भागवत वक्ता आचार्य डॉ.भारतभूषण जी महाराज ने कहा कि मानव जीवन का लक्ष्य भगवान की शरणागति का हमेशा अनुभव करने में ही निहित है। उन्होंने कहा कि जीव को जो सुख शरणागति में मिलता है वह अन्यत्र दुर्लभ है। जीवन भगवान का चिंतन तथा उनकी शरणागति का अनुसंधान करने के लिए मिला है।जिस प्रकार तरंगमाला के रूप में जल का ही दर्शन होता है और विभिन्न आभूषणों के रूप में स्वर्णादि धातुएं ही दिखाई देती हैं उसी प्रकार जगत् के रूप में जगदीश्वर का ही दर्शन होता है। उन्होंने कहा कि इस समय कलिकाल के कारण असली संत, असली ग्रंथ और असली धर्म का विलोप जैसा होने लगा है। धर्म और गुरु के नाम पर सन्मार्ग अर्थात् वैदिक वर्णाश्रम सदाचार की उपेक्षा और देहाभिमान तथा देहाभिमानी तत्त्वों का पोषण हो रहा है। भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की संस्थापना और अधर्म का उन्मूलन तथा संतों – शास्त्रों का परिरक्षण और दुष्टों का विनाश किया था। आयोजन समिति के संयोजक डॉ सत्यनारायण उपाध्याय, सचिव इमलावती देवी, भोजपुर हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सभापति प्रो बलिराज ठाकुर,प्रो नन्दजी दूबे, मधेश्वर नाथ पाण्डेय, विश्वनाथ दूबे, नर्मदेश्वर उपाध्याय,कवि जनार्दन मिश्र, डॉ ममता मिश्रा, डॉ रेणु मिश्रा,जगदीप नारायण ओझा, कामदेव जी, अभिषेक उपाध्याय,के डी झा, नरेंद्र सिंह, अमरदीप जय समेत शताधिक श्रद्धालुओं ने सर्वतोभद्र मण्डल पूजन, रुद्राभिषेक और प्रवचन श्रवण किया। शास्त्रीय गायक राकेश मिश्र तथा अभय उपाध्याय ने भजन प्रस्तुत किया।

