पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 21 अप्रैल। अभी तो पहले चरण का ही मतदान हुआ है। पहले चरण में ही भाजपा का पैर उखड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। भाजपा नेताओं की रात की नींद उड़ गई होगी। 400 पार का नारा लगाने वालों के लिए 200 भी पार कर पाना हिमालय लांघने के बराबर दिखाई दे रहा है। उक्त बातों को राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी ने व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों से भाजपा चुनाव लड़ने के लिए मोदी जी के नाम पर ही निर्भर हो गई है। पंचायत का चुनाव हो या लोक सभा का, प्रत्येक चुनाव में मोदी जी का ही नारा सुनाई देता है। दरअसल मोदी जी के चरम व्यक्तिवाद “एको अहम्, द्वितीय नस्ति” ने पूरी पार्टी को अपने ऊपर आश्रित बना दिया है। मोदी जी पिछले 10 वर्षों से देश के प्रधानमंत्री हैं। लेकिन उनकी सरकार ने देश के गरीबों, किसानों और बेरोजगारों के लिए क्या किया है, यह नहीं बताते हैं। इस चुनाव में भी “मोदी की गारंटी” और “मोदी है तो मुमकिन है” जैसे नारे पर भाजपा चुनाव लड़ रही है। उन्होंने कहा कि भगवान राम, आस्था, रामनवमी में मछली खाना मुगलिया दिमाग, सनातन का अपमान आदि सांप्रदायिकता की ध्वनि मोदी जी के हर भाषण में सुनाई देती है। ऐसी बातें जिनका आम आदमी के सुख-दुख से कोई रिश्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने दम्भ में ऐसे-ऐसे फैसले लिए जिनसे देश आज तक उबर नहीं सका है। रिजर्व बैंक की असहमति के बावजूद मोदी जी ने देश में नोटबंदी का फैसला ले लिया। उसकी मार सबसे ज्यादा गरीबों और छोटे-मोटे व्यवसाय करने वालों पर पड़ी। जीएसटी के बोझ तले छोटे-मोटे व्यवसाय करने वालों की कमर टूट रही है।
उन्होंने कहा कि कोरोना काल को याद कीजिए। अचानक बगैर जानकार लोगों से सलाह मशविरा किये मोदी जी ने देश में कर्फ्यू जैसी हालात पैदा कर दी। शहरों में काम बंद। मालिकों ने रहने का ठिकाना खाली करा दिया। बिना काम शहर में भूख से मरने से अच्छा है गाँव लौटना। गाँव में भूख से तो नहीं मारेंगे। रेल भी बंद। सर पर गठरी लादे बाल-बच्चों समेत सड़कों पर, रेलवे लाइन के किनारे-किनारे हजारों की संख्या में भारत का गरीब तथा सर्वहारा अपने-अपने गाँव की ओर कुछ कर रहा था। उन्होंने इसे असली भारत की तस्वीर कहा।
मोदी जी कोरोना से जंग कैसे लड़ रहे थे! थाली पीटो और मोबाइल का रौशनी जलाओ। दुनिया हॅस रही थी। उन्होंने कहा कि ऐसी सरकार और ऐसे प्रधानमंत्री को देश कब तक सहन करेगा ? इसलिए इस चुनाव में पहले चरण से ही उनकी विदाई का गीत सुनाई देने लगा है।

