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बक्सर:पराली जलाने के आरोप में कृषि विभाग में किसान का पंजीकरण हुआ रद्द,3 वर्षो तक किसी भी योजना का नही मिलेगा लाभ।

RKTV NEWS/ बक्सर (बिहार) 18 अप्रैल।वर्ष 2024 में बक्सर जिले में पराली जाने वाले कृषक श्री देवेंद्र कुमार चौधरी, ग्राम पंचायत-कुकुढा का पंजीकरण संख्या 2321444237237 को बंद कर दिया गया है।
कुछ किसान भाई-बहन फसलों के अवशेष खूंटी आदि को खेतों में जला देते हैं, जिसे पराली जलाना भी कहते हैं। ऐसा करने से मिट्टी एवं पर्यावरण दोनों को नुकसान पहुंचता है, जो इस प्रकार हैं।
फसल अवशेषों को जलाने से मिट्टी का तापमान बढ़ता है जिसके कारण मिट्टी में उपलब्ध जैविक कार्बन जो पहले से ही हमारी मिट्टी में कम है और भी जलकर नष्ट हो जाता है फल स्वरुप मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है।
फसल अवशेषों को जलाने से मिट्टी का तापमान बढ़ने के कारण मिट्टी में पाए जाने वाले सुक्ष्म जीवाणु, केंचुआ आदि मर जाते हैं। इनके मिट्टी में रहने से ही मिट्टी जीवंत कहलाता है। इस प्रकार अवशेषों को जलाने से हम मिट्टी को मरणसन्न अवस्था की ओर ले जाते हैं।
साथ ही जमीन के लिए जरूरी पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं अवशेष को जलाने से मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी हो जाती है, जिसके कारण उत्पादन घटता है। फसल अवशेषों को जलाने से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती है जिसके कारण वातावरण प्रदूषित होता है एवं जलवायु परिवर्तन का कारण बनता है।
एक टन फसल के अवशेष जलने से लगभग 60 किलोग्राम कार्बन मोनोऑक्साइड 1460 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड तथा 2 किलोग्राम सल्फर डाइऑक्साइड गैस का उत्सर्जन होकर वातावरण में फैला है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है।
यदि फसल की कटनी हार्वेस्टर से की गई हो तो खेत में फसलों के अवशेष, खूंटी आदि को जलाने के बदले स्ट्रा रीपर मशीन से भूसा बना ले।
अपने फसल के अवशेषों को खेतों में जलाने के बदले वर्मी कंपोस्ट बनाने, मिट्टी में मिलाने, पलवार विधि से खेती आदि में व्यवहार कर मिट्टी को बचाएं तथा संधारणीय कृषि पद्धति में अपना योगदान दें।
फसल अवशेष को खेतों में न जलाने से कृषि विभाग से संबंधित कार्य एवं दायित्व:-
जिला अंतर्गत आत्मा एवं कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से कृषको को फसल अवशेष न जलाने हेतु प्रशिक्षित किया जाता है। पंचायत स्तर पर आयोजित किसान चौपाल एवं कृषि विभाग के अन्य कार्यक्रम से फसल अवशेष न जलाने हेतु किसानों को जागरूक करना। समय-समय पर समाचार पत्रों में विज्ञापन के माध्यम से किसानों को जागरूक करना। खेतों में अवशेष को जलाने के बदले खेत की सफाई हेतु वेलर मशीन का प्रयोग फसल अवशेष को वर्मी कंपोस्ट एवं म्लीचंग विधि से खेती आदि में व्यवहार कर मिट्टी को बचाना साथ ही साथ हैपी सीडर से गेहूं की बुवाई का प्रत्यक्षण को प्रोत्साहित करना।
इसके उपरांत भी पराली जलाए जाने पर कृषि विभाग द्वारा सख्ती से कारवाई की जा रही है। सैटेलाइट के माध्यम से चिन्हित किए गए स्थलों के सत्यापन के उपरांत पराली जलाने वाले किसानों का कृषि विभाग के द्वारा किसान पंजीकरण को बंद किया जा रहा है। जिससे संबंधित किसान द्वारा अगले 03 साल तक कृषि विभाग की किसी भी योजनाओं का लाभ नहीं प्राप्त किया जा सकता है।

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