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“उसके बूटों के नीचे दबा है एक देश, भाग रहे हैं लोग” : कवयित्री विमल किशोर

‘सृजन के सहयात्री’ कार्यक्रम तहत काव्य-पाठ।

RKTVNEWS/ आरा (भोजपुर) 31 मार्च।आज जन संस्कृति मंच, आरा-भोजपुर की ओर से ‘सृजन के सहयात्री’ के रूप में लखनऊ से आये वरिष्ठ कवि-संपादक कौशल किशोर तथा कवयित्री विमल किशोर के काव्य-पाठ का आयोजन किया।
स्थानीय ‘बाल हिंदी पुस्तकालय’ में आयोजित इस कार्यक्रम में आये कवियों व अतिथियों का स्वागत करते हुए वरिष्ठ कवि-कहानीकार जितेंद्र कुमार ने आगत कवि द्वय का एक संक्षिप्त परिचय दिया। उन्होंने कौशल किशोर तथा विमल किशोर के काव्य संग्रह क्रमश: ‘वह औरत नहीं, एक महानद्य थी’ तथा ‘पंख खोलूं, उड़ चलूं’ की कविताओं के सहारे बताया कि कौशल किशोर और विमल किशोर की कविताओं का विषय काफी मौजू है। कवि द्वय ने अपने-अपने पक्ष का संघर्ष उसके यथार्थ रूप की अभिव्यक्ति की है।
काव्य-पाठ की शुरुआत करते हुए विमल किशोर ने एक मुट्ठी रेत, युद्ध के विरुद्ध, यादों का सिलसिला, मजहबी सब्जी, घड़ी की सुइयाँ, ऐ सुंदर लड़कियों, रोटी , चाहत तथा गटर में जैसी अपनी चुनिंदा कविताओं से श्रोताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। वहीं कौशल किशोर ने कविता, लौटना, बाबूजी का छाता ,वह हामिद था, मैं और मेरी परछाई, वक्त कविता में हमलावर होने है, अँधियारे में उजियारा तथा सत्तर पार करना जैसी कविताएँ सुनाकर उपस्थित लोगों को भाव-विभोर कर दिया।
कविताओं पर अपनी बात रखते हुए प्रो.अयोध्या प्र.उपाध्याय ने कहा कि कवि दम्पत्ति के पास नई दृष्टि व आधुनिक भाव-बोध है। आलोचक प्रो.रविंद्रनाथ राय ने कहा कि कौशल जी किया कविताएँ प्रेमचंद के रचना सरोकार का आधुनिक विस्तार है। कवि बल्लभ ने कहा कि विमल जी की कविताएँ नॉस्टैल्जिक होते हुए भी मानवता के पक्ष में हैं। वहीं कवि जनार्दन मिश्र ने कहा कि विमल किशोर की कविताएँ विराट अनुभव से सृजित स्त्री पक्ष की सशक्त अभिव्यक्ति हैं।
अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में वरिष्ठ रचनाकार सुरेश कांटक ने बताया कि कविताओं में निजता के साथ-साथ एक व्यापक स्त्री चेतना भी व्यक्त है। वहीं कौशल किशोर की कविताओं में सृजन की एक ऐसी चिंगारी दीपदीपा रही है जो कवि के एक्टिविस्ट को इन कविताओं में कई प्रकार से जगह देती है।
इस कार्यक्रम के क्रम में आज सृजन लोक पत्रिका के संपादक कवि संतोष श्रेयांश द्वारा कवि ओमप्रकाश मिश्र को उनके काव्य-संकलन ‘खलिहान’ के लिए इस वर्ष का ‘सृजन-लोक’ सम्मान से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर इम्तियाज दानिश, अरविंद अनुराग, रविशंकर सिंह, ममता मिश्र, आशुतोष कुमार पाण्डेय, सूर्यप्रकाश, विशाल यादव, रामयश अविकल आदि अनेक रचनाकार-कलाकार भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन कवि सुमन कुमार सिंह व धन्यवाद ज्ञापन कवि सुनील चौधरी ने किया।

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