जनहित परिवार रजत जयंती श्रृंखला के तहत अतुल प्रकाश द्वारा संपादित सरदार भगत सिंह का अंतिम शहीदी पत्र एवं उनके वैचारिक दस्तावेज नामक पुस्तिका का विमोचन।
RKTV NEWS/आरा (भोजपुर)23 मार्च।आज शनिवार को शहीद दिवस के अवसर पर जनहित परिवार भोजपुर के तत्वाधान में सरदार भगत सिंह स्मारक करमन टोला, स्टेशन रोड, आरा स्थल पर सरदार भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत पर सरदार भगत सिंह की मूर्ति पर पुष्पांजलि-माल्यार्पण अर्पित किया गया तथा इस अवसर पर जनहित परिवार रजत जयंती प्रकाशन श्रृंखला के तहत अतुल प्रकाश द्वारा संपादित “सरदार भगत सिंह का अंतिम शहीदी पत्र एवं उनके वैचारिक दस्तावेज नामक पुस्तिका” का विमोचन जगत् नंदन सहाय के द्वारा किया गया। पुस्तिका का उद्देश्य बताते हुए अतुल प्रकाश ने कहा कि आजादी के 75 वर्ष बाद भी वर्तमान पीढ़ी को सरदार भगत सिंह सरीखे क्रांतिकारियों के बारे में बहुत कम जानकारी है।
उन्होंने बताया कि इस पुस्तिका में सरदार भगत सिंह के शहादत से पहले का साथियों को संबोधित अंतिम पत्र के अलावा युवक, इंकलाब की धार विचारों की शान पर तेज होती है , सांप्रदायिक दंगे और उसका इलाज, अछूत समस्या, मैं नास्तिक क्यों हूं? सहित सरदार भगत सिंह लिखित कुल पांच निबंध दस्तावेज के रूप में संकलित हैं। इस पुस्तिका की हार्ड कॉपी और सॉफ्ट कॉपी जारी करते हुए विमोचनकर्ता साहित्यकार जगत नंदन सहाय ने कहा कि सरदार भगत सिंह ने कहा है कि लक्ष्य सपनों से बड़े होते हैं और उन्होंने फांसी का फंदा चूम कर बता दिया।
आम जनता को गुलाम बनाने वाली, आम जानकी स्वतंत्रता में बाधक सोच वाली तानाशाही सरकार के के विरुद्ध प्रतिरोध करना आम जनता का कर्तव्य है।
नंदकिशोर सिंह कमल ने कहा कि सरदार भगत सिंह वैचारिक इंकलाब के प्रतीक हैं। साहित्यकार कृष्ण कुमार ने भोजपुरी साहित्य में भगत सिंह के प्रसंगों को उद्धृत किया। सभा को संबोधित करने वालों में अशोक श्रीवास्तव, रमेश सिंह, बृजमोहन त्रिपाठी आदि प्रमुख थे। संक्षिप्त लघु गोष्ठी का संचालन नंदकिशोर सिंह कमल ने किया।


