आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)10 मार्च।09 मार्च को महिला दिवस पर अठारह वर्ष की उम्र तक सभी बच्चों को अनिवार्य और मुफ्त शिक्षा से 2030 तक देश से बाल विवाह के खात्मे में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। देश के160 गैरसरकारी संगठनों के गठबंधन बाल विवाह मुक्त भारत अभियान द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जारी एक शोधपत्र “एक्सप्लोरिंग लिंकेजेज एंड रोल्स ऑफ एजुकेशन इन एलिवेटिंग एट मैरेज फॉर गर्ल्स इन इंडिया” में उजागर हुआ है।शोधपत्र के अनुसार, भारत बाल विवाह की बुराई के 2030 तक खात्मे की राह में एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है।यदि 18 वर्ष की उम्र तक मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा एक वास्तविकता बन जाए तो बाल विवाह के अपराध को जड़मूल से समाप्त करने की इस लड़ाई को एक नई धार और दिशा मिल जाएगी।

सचिव ने बताया की बाल विवाह मुक्त भारत अभियान 2030 तक बुराई खात्मे के लिए 300 से ज्यादा जिलों में इसके खिलाफ जमीनी अभियान चला रहे 160 गैरसरकारी संगठनों का गठबंधन है।पिछले छह महीनों के दौरान ही देश में 50,000 से ज्यादा बाल विवाह रोके हैं जबकि 10,000 से ज्यादा मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।पूरे देश में कुल पांच प्रतिशत बाल विवाह रुकवाने में कामयाबी हासिल की है। भोजपुर और बक्सर में इस शोधपत्र के निष्कर्षों को जारी करते हुए बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के सहयोगी संगठन दिशा एक प्रयास ने कहा कि यद्यपि केंद्र व राज्य सरकार ने इस सामाजिक अपराध के खात्मे में प्रशंसनीय इच्छाशक्ति व गंभीरता दिखाई है, फिर भी बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई को धार देने के लिए कुछ और अहम कदम उठाने की दरकार है।
बाल विवाह के खात्मे के लिए 18 वर्ष तक अनिवार्य और मुफ्त शिक्षा का कदम महत्वपूर्ण है।सभी राजनीतिक दलों आगामी लोकसभा के चुनावी घोषणापत्र में शामिल करें।
दिशा एक प्रयास के निदेशक कुमारी सुनिता सिंह ने कहा कि फिलहाल राष्ट्र को शिक्षा को शीर्ष प्राथमिकता देने की जरूरत है और हम सरकार से बाल विवाह पर पूरी तरह प्रतिबंध की मांग करते हैं।
