शिव -वंदना !
मनुआ बोल रहा है भोले,
जो हैं जीवन मैं रस घोले,
जिनके गले सर्प की माला,
जो पहने वाघाम्बर आला,
बोलो उनका ही जयकारा,
जो हैं शंकर डमरू बाला।
जो हैं सबको औढरदानी,
जिसका नहीं देव में सानी,
जो है गंग शीश पर धारे,
है जिनके गुण सबसेन न्यारे,
बोलो उनका ही जयकारा,
जो है शंकर डमरु वाला।
जो है सबके घट घट वासी,
जो है बैद्यनाथ अविनाशी,
जो नटराज बने कैलाशी,
शोभित नगरी जिनसे काशी,
बोलो उनका ही जयकारा
जो है शंकर डमरु वाला।
शिव शक्ति से ही पूर्ण बने,
आशीष लुटाते सदा घने,
जो है देवों के भी महादेव,
है प्राणी की आशा एकमेव,
बोलो उनका ही जयकारा,
जो है शंकर डमरु वाला।।
*राज किशोर वाजपेयी”अभय”*
*ग्वालियर*


शिव -वंदना !