- आरा/भोजपुर( *डॉ०दिनेश प्रसाद सिन्हा* )ऐसी मान्यता है कि श्री हनुमान जी आज भी धरती पर जीवित हैं, प्रभु श्री राम मे श्रद्धा भक्ति रखने वाले आस्थावान लोगों की मनोकामना को पूर्ण करते हैं, बीबीजहां राम नाम की चर्चा होती है वहां उपस्थित रहते हैं। इसी क्रम में *एक सौ तीस* साल से पहले छोटा सा पांच स्क्वायर फीट में हनुमान जी के लिए स्थान का चयन स्मृति शेष सुरेश नंदन सिन्हा ने स्थानीय मोहल्ला वासियों के सहयोग से किया। वहीं से इसका शुभारंभ है।

नगर निगम का सबसे पुराना नक्शा में एक डॉट के रूप में स्थान दिखाया गया है। जहां एक बड़ा सा कुआं और खाली स्थान है। यह कुंआ आज भी ऐतिहासिक धरोहर के रूप में शीतल, मीठा पानी देने वाला धार्मिक कार्यों के लिए उपयोग में आता है। छठ पूजा और अन्य शुभ कार्यों के लिए कुए का पानी लोग श्रद्धा से उपयोग में लाते हैं।
इसी के बगल में शादी के समय माटी कोड़ने का मांगलिक कार्यक्रम होता है जिसमें महिलाएं झुंड के रूप में लड़कियों के शादी के पूर्व मिट्टी कोड़कर ले ली जाती है कब शुरू होता है शादी के अन्य शुभ कार्य। दूर-दूर से महिलाएं आकर धार्मिक, ऐतिहासिक महत्व को स्वीकार करते हुए हनुमान जी की पूजा और कृपा प्रसाद मानती है तथा उनको लगता है कि हनुमान जी की कृपा से हमारी बेटी सौभाग्यवती रहेगी। प्राचीन काल से महावीरी झंडा जो हनुमत बसंत बसंत उत्सव के समय निकलता है उसमें लोग गाजा बाजा बैंड और हनुमान जी को रथ पर बैठा कर जुलूस निकालते थे इस क्रम में गदका भांजना ,लाठी भांजना, कुश्ती अन्य कई तरह के अपना शारीरिक करतब दिखाते थे। इसमें हनुमान जी बन कर झांकी निकालते थे। यह भी सामाजिक एकता का मिसाल था कि यही लोग हनुमान जी की झांकी निकालते थे और ताजिया भी। समय के क्रम में पहले जो लकड़ी का चबूतरा,लकड़ी के हनुमान जी का झांकी निकलता था।
निकलता था लकड़ी का ताजिया स्वरूप में निकलता था खुले आसमान में रहने के कारण खराब हो जाने से नए राष्ट्र निर्माण का निर्णय हुआ और 2005 में नया रथ श्री हनुमान जी के लिए समर्पित किया गया जिस पर केवल हनुमान जी विराजमान होकर बसंतोत्सव के दिन शहर भ्रमण में निकलते हैं। मंदिर का वार्षिक कार्यक्रम होता है जिसमें स्वयंसेवकों का सम्मान और रथ खींचने की परंपरा है। ऐसे कई स्वयंसेवक हैं जो खुले रूप से बताते हैं कि पवित्र मन में संकल्प लेकर जो हनुमान जी का रथ खींचते हैं उनकी मनोकामना हनुमान जी पूरा करते हैं ।इसीलिए इस मंदिर को मनोकामना पूर्ण मंदिर के नाम से जाना जाता है।इस मंदिर में तीन बार मंदिर का ताला तोड़कर, दानपात्र को उठा कर ले गए लेकिन हनुमान जी के प्रभाव से पुनः वापस आया। वापस किसी न किसी माध्यम से वापस आ गया। मंदिर के आसपास जो छोटा सा खाली स्थान था उसको भी हड़पने के नियत से तीन बार समिति के ऊपर केस और फंसाने का प्रयास किया गया लेकिन हनुमान जी के प्रभाव से सभी स्वयंसेवक आज भी हनुमान जी की सेवा में लगे हैं। गलत करने वाले को हनुमान जी स्वयं देखते रहते हैं। मंदिर की अपनी विशेषता है कि सभी धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ निशुल्क स्वास्थ्य जांच दवा के साथ ,मोतियाबिंद ऑपरेशन, योग की शिक्षा आदि लाभकारी कार्यक्रम चलाए जाते हैं। निर्धन लोगों के लिए हर साल कंबल का वितरण, होली में साड़ी का वितरण, जरूरतमंदों के लिए रक्तदान शिविर, विद्यार्थियों के हौसला बढ़ाने के लिए उनका सम्मान, चिकित्सकों का सम्मान महिलाओं का सम्मान, महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि ध्यान से प्रेरणा देना 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम में संलिप्तता, मंदिर में अपनी सारी व्यवस्था जिसमें कुर्सी, कारपेट, माईक,सीसीटीवी कैमरा, गुंबज का निर्माण ऊपर हॉल का ढलाई और कार्यालय अभी निर्माणाधीन है, आधुनिक मनोकामना रथ एवं रथ घर के साथ साथ आवश्यक सामग्री उपलब्ध है ।मंदिर का ऑडिटेड हिसाब, हनुमान जी की महिमा पर उपलब्ध ,साठ हनुमान जी पर लेख, बुद्धिजीवियों आज सामाजिक कार्यकर्ताओं के शुभकामना से श्री हनुमत पुष्पा स्मारिका का लोकार्पण महत्वपूर्ण उपलब्धि रही है। जनहित में प्रति माह लगातार कार्यक्रमों का संचालन अध्यक्ष डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा एवं सहयोगियों के द्वारा चलाए जाते हैं। हनुमान जी की महिमा गाथा सैकड़ों भक्तों ने सुनाई और सुना रहे हैं जिसे अगले संस्करण में जोड़ा जाएगा। सच में हनुमान जी से जुड़ने वाले हैं सब की मनोकामना पूर्ण होती है।
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