
बचाया बहुत है..!
यह सच है की मैने कमाया नहीं है,
मगर इनके पैसों को लुटाया नही है।
रक्खा है मैने पाई पाई का हिसाब,
फालतू कही पर भी उड़ाया नही है।
रौब मैने किसी पे कभी जमाया नही है,
बड़े घर की बेटी हूं धौंस दिखाया नही है।
घर का सारा काम कर लेती हूं अकेली
दाई, नौकर पे रुपया लुटाया नही है।
काम करने से कभी थकती नही,
काम से कभी जी चुराया नही है।
सब कुछ बना के घर में खिला देती हूं,
होटल से कभी खाना मंगाया नही है।
देख के दुसरो के सुख को कभी,
अपने जी को मैने जलाया नही है।
दिला दो मुझे भी मोटर बंगला गाड़ी,
कभी इनको ताना सुनाया नही है।
जितना है मेरे पास उतने में ही रहती हूं मैं,
चादर से बाहर कभी पैर फैलाया नही है।
हो जाऊं मैं भी करोड़ों की मालकिन,
लालच दिल में कभी अपने लाया नही।
(साभार शब्दों की सरिता मंच)

