
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 19 फरवरी।वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा,की अंगीभूत इकाई जगजीवन कॉलेज, आरा के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ अमरेश कुमार “महेंद्र मिसिर का व्यक्तित्व एवं कृतित्व” पर अपना व्याख्यान जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय गोष्ठी में देंगे।यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर 21 एवं 22 फरवरी, 2024 को प्रतिष्ठित भारतीय भाषा साहित्य एवं संस्कृति अध्ययन संस्थान, दिल्ली भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद(आईसीएसएसआर),दिल्ली एवं मैथिली- भोजपुरी अकादमी, दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। इसके संयोजक जेएनयू के हिंदी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ राजेश पासवान हैं।अपने शोध लेख के संदर्भ में डॉ अमरेश कुमार ने बताया कि महेंद्र मिसिर का व्यक्तित्व और कृतित्व जितना व्यापक बहुआयामी एवं बहुरंगी है,आज भी वह उतना ही व्यापक विमर्श का बाट जोह रहा है । बेशक मिसिर जी ‘पुरबी’ के जनक व बेताज बादशाह हैं।किन्तु हम उन्हें सिर्फ पुरबी के बादशाह तक सीमित कर उनकी उदात्त भक्ति परक रचनाओं, स्त्री-विमर्श संबंधी रचनाओं एवं विशेष तौर पर पूर्वांचल(पश्चिमी बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश सउँसे उतर से दखिन) के श्रमिकों की सदियों पुरानी बेरोजगारी एवं पलायन की पीड़ा संबंधी रचनाओं को अनदेखा कर हम उनके साथ न्याय नहीं कर सकते। उनके गीतों पर सवार होकर भोजपुरी भाषा एवं संस्कृति देश से लेकर सात समुंदर पार तक अपनी मिठास महक एवं धमक आज भी बिखेर रही है। महेंद्र मिसिर वस्तुतः भोजपुरी भाषा एवं संस्कृति के प्रतिनिधि रचनाकार हैं।

