
ऋतुओं का राजा…!
ऋतुओ का राजा अभिनंदन है आपका!
झूम -झूम पेड़ गा रहा वंदन है आपका !
लेकर सुगंध बह रही पवन ,
मदमस्त हो कह रही अभिनंदन है आपका!
बहुत दिवस बीत गए सारी सृष्टि कुम्हला गई !
आपके आने से हरे भरे बाग हो,
मीठे स्वर में कोयल गीत गाने लगी !
पीले -पीले चादर ओढ़ वसुंधरा इतराने लगी !
आमों के बौरों में भंवरे गुनगुनाने लगी !
एक ही स्वर में गाने लगी..!
ऋतुओं का राजा अभिनंदन है आपका !
खिल उठी पूरी धरती सूखे पेड़ हंस पड़े!
नए-नए कोंपलों से डालियां भर उठे !
धरती की गोद में सो रही बीज फूट पड़ी !
आॕखें खोल ली सब ने अंगड़ाई !
ऋतुओं का राजा स्वागत है आपका!
साभार शब्दों की “सरिता मंच”

