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स्व माथुर जी शहर के एक अविभावक की तरह थे : अशोक मानव

आरा/भोजपुर 30 जनवरी।आज आरा के वरिष्ठ साहित्यकार व शिक्षक स्व. रणजीत बहादुर माथुर के श्राद्ध कर्म के मौके पर आरा के साहित्यकार व रंगकर्मियों ने उनके तेलचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता भोजपुर हिंदी साहित्य समेलन के अध्यक्ष प्रो बलराज ठाकुर एंव संचालन रंगकर्मी व समाजिक कार्यकर्ता अशोक मानव ने किया।
मौके पर साहित्यकार प्रो. डा.नंद जी दुबे,साहित्कार जीतेन्द्र कुमार,रविशंकर सिंह, अनिरुद्ध, पुष्पा माथुर, अमरेन्द्र, ऋतू राज, दुर्गेश,सुमन माथुर, सुशील, प्रवीन माथुर, प्राची माथुर, सलिल भारती, मनीष नाथ, चंदन ओझा, मारुति नन्दन भारद्वाज व अन्य लोगों ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। साहित्यकार रणजीत बहादुर के निधन पर अध्यक्ष प्रोफेसर बलिराज ठाकुर की अध्यक्षता में शोक-सभा आयोजित हुई। स्व. माथुर जी के प्रति वक्ताओं की भावाभिव्यक्ति के बाद दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गयी। अत्यंत दुख के साथ शोक- प्रस्ताव पारित किया गया। वक्ताओं ने अपनी भावाभिव्यक्ति में साहित्य के क्षेत्र में उनके अवदान को महत्वपूर्ण बताया। उनके कविता संग्रह, कहानी संग्रह की ओर संकेत करते हुए वक्ताओं ने उसके संबंध में चर्चा भी की। मास्साहब के नाम से मशहूर माथुर जी का जीवन कला और साहित्य को समर्पित रहा। आरा शहर की सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भूमिका रहती थी। शोक सभा के अध्यक्ष प्रोफेसर बलिराज ठाकुर ने माथुर जी को उदार चरित का मानव बताते हुए उनके लेखन को सामाजिक जीवन के लिए प्रेरणा का स्रोत कहा। शिक्षक होने के नाते शिक्षा के क्षेत्र में उनका बड़ा नाम था। वें जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए आतुर रहते थे। प्रोफेसर ठाकुर ने कहा कि उनका निधन सदा खलता रहेगा। रंगकर्मी अशोक मानव ने कहा कि हमने एक उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षक, साहित्यकार, रंगकर्मी,राज्य स्तर के बैडमिंटन ,फुटबॉल खिलाड़ी,समाजिक कार्यकर्ता व नेक दिल इंसान को खो दिया है। ये पूरे शहर के एक अविभावक की तरह थे, इनके मार्गदर्शन पर कईयों ने एक सफल मार्ग पाया है। प्रीति रानी( मन्नी) ने कहा की माथुर मौसा जी की के अंदर अनेकों गुण थे, समाज के हर वर्ग के साथ उनका ताममेल सादगीपूर्ण था उतना ही परिवार को मिला कर चलना भी जानते थे। उनकी सोच में रूढ़िवादिता नहीं थी वो यथार्थ में जीने वाले शख्सियत थे।
सावन कुमार ने कहा माथुर चाचाजी को बच्चों से काफी लगाव था। चाचाजी ने कई गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए अविभावक की भूमिका में रहें साथ ही कई गरीब बच्चों की पढ़ाई से संबंधित जरूरतों को पूरा किया है। ये किसी एक वर्ग में बंट कर नहीं रहे। समाज के हर वर्ग से इनकी काफी घनिष्ठा थी। वो चाहे उच्च पद का व्यक्ति हो या चाय वाला, रिक्शा वाला, मजदूर यहां तक की सफाईकर्मियों के बीच भी काफी लोकप्रिय थे,उनके साथ भी उनका व्यवहार मित्रवत था।

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