नई दिल्ली/08 जनवरी।केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में 5 राज्यों के PACS को प्रधानमंत्री भारतीय जन-औषधि केंद्र के संचालन के लिए स्टोर कोड वितरित करने के कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उवर्रक मंत्री मनसुख मांडविया, सहकारिता राज्य मंत्री बी एल वर्मा सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
महासंगोष्ठी को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में तय किया गया है कि प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को अन्य कामों में जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत किया जाए और आज इसी उद्देश्य का विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश भर की 2373 PACS को सस्ती दवा की दुकान यानी जन औषधि केंद्र के रूप में स्थापित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की गारंटी को सार्थक करने के लिए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि जन औषधि केंद्र ज्यादातर शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं, जिसकी वजह से केवल शहर के गरीबों को ही उनका फायदा मिलता था और उन्हें 10 रुपए से लेकर 30 रुपए तक सस्ती दवाएं मिलती थीं, मगर PACS के माध्यम से अब ग्रामीण क्षेत्र के गरीबों और किसानों के लिए भी सस्ती दवाइयां उपलब्ध होंगी।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि सालों से फार्मेसी के क्षेत्र में भारत विश्व में अग्रणी रहा और विगत 10 साल में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने फार्मेसी के क्षेत्र में ढेर सारे सुधार किए और आज पूरे विश्व में भारत फार्मा क्षेत्र का एक विश्वस्त उत्पादक देश बन गया है। लेकिन एक विडंबना थी कि दुनिया भर को दवाएं भेजने वाले भारत में 60 करोड़ की आबादी ऐसी थी जिनके भाग्य में दवाएं नहीं थीं, क्योंकि दवाएं महंगी होने के कारण वे दवाएं खरीद ही नहीं पाते थे। लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने जेनरिक दवाओं की व्यवस्था को स्ट्रीमलाइन कर भारतीय जन-औषधि केंद्र के माध्यम से 60 करोड़ गरीबों तक दवाइयाँ उपलब्ध करवाई। इससे ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत सुधार हुआ।
अमित शाह ने कहा कि बीते नौ साल में जन औषधि केंद्रों के माध्यम से इस देश के गरीबों के लगभग 25,000 करोड़ रुपए की बचत हुई है। उन्होंने कहा कि सहकारिता क्षेत्र के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र में अब जन औषधि केंद्रों की पहुंच बढ़ने जा रही है और आने वाले दिनों में ग्रामीण गरीबों को भी किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने खुशी जताई कि सहकारिता क्षेत्र इस पहल में माध्यम बनने जा रहा है।
योजना, नेशनल हेल्थ मिशन, मलेरिया मुक्त भारत, सार्वभौमिक टीकाकरण के लिए मिशन इंद्रधनुष, टीबी उन्मूलन कार्यक्रम, मातृ वंदना योजना, जननी सुरक्षा योजना, नेशनल मेंटल हेल्थ प्रोग्राम, फिट इंडिया, खेलो इंडिया और डायलिसिस प्रोग्राम जैसे ढेर सारे कार्यक्रमों का जाल बुनकर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने गरीबों, खासकर बच्चों और किशोर—किशोरियों के स्वास्थ्य सुधार का काम किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के तहत आज जन औषधि केंद्रों की संख्या 10000 से ज्यादा हो गई है, जिनमें 2260 से ज्यादा दवाइयां और साधन मिलते हैं।
सहकारिता मंत्री ने कहा कि विश्व के फॉर्म क्षेत्र में जेनेरिक दवाइयां, वैक्सीन, सस्ती एचआईवी दवाएं विश्व में सप्लाई करने में भारत का पहला स्थान है। फार्मा और बायोटेक प्रोफेशनल तैयार करने में हम दूसरे नंबर पर हैं। दवा के ओवरऑल उत्पादन में भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2047 तक सभी क्षेत्रों में भारत दुनिया में नंबर एक बनेगा और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का आत्मनिर्भर भारत का सपना सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया को पहले 90145 करोड़ रुपए की दवाएं एक्सपोर्ट करता था, लेकिन अब 183000 करोड रुपए की दवाओं का एक्सपोर्ट कर रहा है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में कई सारे देश वैक्सीन नहीं बना पाए थे लेकिन प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हमारे वैज्ञानिकों ने न सिर्फ वैक्सीन बनाया बल्कि देश के हर गांव के गरीब से गरीब व्यक्ति तक वैक्सीन और सर्टिफिकेट दोनों पहुंचाए भी गए जिनसे कोरोना से बचाव हो सका।

