
गाजीपुर/उत्तर प्रदेश 04 दिसंबर।भारतीय लोक साहित्य एवं संस्कृति को संरक्षित एवं संवर्धित करने के उद्देश्य से जीवनोदय शिक्षा समिति, राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय एवं स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित ‘ उत्तर सत्ययुग में भोजपुरी भाषा एवं संस्कृति का पुनरावलोकन’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसके के उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो सदानंद शाही ने कहा कि उत्तर सत्य का अर्थ होता है सत्य के बाद का समय। सत्य के बाद या तो झूठ होता है या अति सत्य। भोजपुरी इसी की शिकार है। उसके नाम पर तमाम तरह के झूठ फैलाए गए हैं। तमाम तरह के मनगढ़ंत आरोप मढ़े गए है। यह भोजपुरी का दुर्भाग्य ही है दुसरे सत्र में भोजपुरी कला संस्कृति, भोजपुरी चित्र, भोजपुरी सिनेमा पर बात हुई जिसमें बतौर वक्ता चित्रकार संजीव सिन्हा ने कहा कि भोजपुरी चित्रकला का संरक्षण व संवर्धन तभी संभव है जब भोजपुरी भाषा भाषी लोगों में अपनी कला व संस्कृति के प्रति गौरव बोध होगा। इसके लिए छोटे बड़े अस्तर पर कार्यशाला बहुत जरूरी माध्यम है, भोजपुरी सिनेमा पर सुप्रसिद्ध भोजपुरी कवि, फिल्म इतिहासकार, टेलिविजन प्रस्तोता आदरणीय मनोज भावुक ने भोजपुरी फिल्मों के अब तक इतिहास पर चर्चा की। अन्य वक्ताओं में वंदना दुबे, श्रीकांत दुबे, प्रो. शांतिस्वरूप सिन्हा, बि.एच.यू ने अपनी बात रखीं।

चित्रकार संजीव सिन्हा को भोजपुरी कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए कला सृजन सम्मान-23 से नवाजा गया। समिति के अध्यक्ष प्रो. रामनारायण तिवारी ने कहा की संजीव सिन्हा ने भोजपुरी कला यात्रा, सर्जना न्यास के माध्यम से जो मुहिम चला रहे हैं लोक कला में समकालीन विषयों का समावेश जिसमें परंपरा के साथ जन मानस की बात करते हैं सही अर्थो में लोक कला यही सार्थकता है कार्यक्रम में उपस्थित लोगों में तुर्की से पधारी एस टी जस्सल, अमेरिका से आए माइकल बोनेलॉक, लीबिया से प्रोफेसर अनिल प्रसाद, आदी लोग उपस्थित थे। सत्र का संचालन जयनंदन ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डा रामनारायण तिवारी ने किया।
