आरा/भोजपुर 23 नवंबर।लीजेंड बक्शी कुलदीप नारायण सिन्हा मेमोरियल कल्चरल सोसायटी के तत्वाधान में आयोजित साप्ताहिक कार्यक्रम गुरुवासरे संगीत सभा का उद्घाटन कवियित्री डॉ. किरण कुमारी ने दीप प्रज्जवलित कर किया। स्थानीय महाजन टोली स्थित ठाकुरबाड़ी प्रांगण में इस सांगीतिक सभा को संबोधित करते हुये किरण कुमारी ने कहा कि आदिकाल से वर्तमान तक संगीत की अनुगूंज सृष्टि में यथावत है। पौराणिक आख्यानों में ईश्वर द्वारा सांगीतिक प्रस्तुति के कई उदाहरण व्याप्त है। भगवान शिव ने डमरू से नाद की उत्पत्ति कर स्वरों की स्थापना की। स्वर ही ईश्वर है और स्वर ही ब्रह्म है। । इस अवसर पर चर्चित संगीतज्ञ चंद्रमोहन ओझा ने राग खमाज, राग देश, राग पीलू समेत विभिन्न रागों में कई ठुमरी दादरा व भजन की प्रस्तुति कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं “कवन गली गयों श्याम बता दे गुइया” व “मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयों रे” के मधुर स्वरों की अनुगूंज से वाहवाही लूटी।
चम्द्रमोहन ओझा के हारमोनियम पर लहराती अंगुलियों ने दर्शकों को खासा प्रभावित किया। तबले पर गुरु बक्शी विकास ने बखूबी संगत किया। मंच संचालन शंभू शरण ओझा व धन्यवाद ज्ञापन संयोजक अमित कुमार ने किया। इस अवसर पर दिनेश्वर प्रसाद , राणा प्रताप सिन्हा , तबला वादक कृष्ण कान्त मानस , महंत रामाशीष दास, शास्त्रीय गायक महेश यादव रवि शंकर, स्नेहा पाण्डेय, संरक्षक सुशील कुमार ‘देहाती’, श्रेया पाण्डेय समेत कई संगीत रसिक व प्रशिक्षु उपस्थित थे।

