भोपाल/मध्यप्रदेश 23 नवम्बर।शब्द शिल्पियों के मंच रंजन कलश की मासिक काव्य गोष्ठी विनोद जैन की अध्यक्षता और वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश पटवा के मुख्य आतिथ्य में पिपलानी जैन मंदिर परिसर में संपन्न हुई। सबसे पहले विगत गोष्ठी में सुनाई रचनाओं की विनोद जैन द्वारा तैयार पुस्तक का विमोचन किया गया। सुरेश पटवा ने कहा कि साल भर में बारह माहों में सुनाई रचनाओं का साझा संकलन अगले वर्ष प्रकाशित किया जाएगा।
विनोद जैन ने सरस सरस्वती वंदना प्रस्तुत करने के बाद “ख़ामी तो मुझमें थी सारी”, सुरेश पटवा ने “अहबाब ज़ेरे ख़ाक सुला कर चले गये, महबूब आंसुओं में नहा कर चले गये, संस्था के अध्यक्ष सुशील गुरू ने “तूने कहा था कि नैनों में चले आना”, प्रेम चंद गुप्ता ने “किसी को अपने अमल का हिसाब क्या देते, जवाब देना मना था जवाब क्या देते, चन्द्र पाल चौहान ने “वो रूठे नहीं हैं मना कर तो देखो”, प्रेम मनोहर खरे ने “सेवा कर रहा बेटा तो ठीक है, नहीं कर रहा है तो भीख नहीं लेना है”, बिहारी लाल सोनी ने “आओ पिया लौट चलें अपने ही गाँव”, चरण जीत सिंह ने “सबके अंतस् हैं छुपे सूफ़ी संत फ़क़ीर”, मनीष बादल ने “झूठ को बेनक़ाब करना है”, सतीश श्रीवास्तव ने “राज खुलने में भी कोई राज़ छुपा होता है”, रूपाली सक्सेना ने “नन्हे क़दमों से चलता बड़ा हो गया मुझे पता ही नहीं चला मेरा बेटा कब बड़ा हो गया”, सत्य प्रकाश सक्सेना ने “सितारे ज़मीं पर आते हैं”, डॉ आनंद सिंह गौतम ने “बच्चों के बिना बसर अच्छा नहीं लगता बुजुर्गों के बिना घर अच्छा नहीं लगता”, डॉ शशिकांत मिश्रा “जब भी कोई ग़म सताता है”, चन्द्रभान सिंह ने मधुर गीत “प्रेम राधा ने चखा प्रेम मीरा ने”, चन्द्रभान सिंह चंदर ने सफल संचालन और सतीश श्रीवास्तव ने आभार उपस्थित रचनाकारों का व्यक्त किया।
