पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 19 नवम्बर। सूर्य का उगना और डूबना सृष्टि की अनवरत प्रक्रिया है। भगवान सूर्य की पूजा से जुड़ा है सूर्य उपासना का महापर्व छठ। चार दिनों तक चलने वाला पर्व छठ पूरी शुद्धता और सात्विकता से किया जाता है। नहाय-खाय से शुरू होकर खरना, अस्ताचलगामी एवं उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पण के बाद इस पर्व का इतिश्री होता है। दीवाली,चित्रगुप्त पूजा और भाईदूज के बाद से छठ पूजा की तैयारी शुरू हो जाती है। कार्तिक महीने में लोक आस्था और सूर्योपासना के महापर्व छठ की पूजा की जाती है।
इस पर्व की शुरुआत में कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को छठव्रतियों ने गंगा स्नान कर तथा नहा धोकर शुद्धता एवं पवित्रता से चावल, चना का दाल, लौकी की सब्जी तथा तरह-तरह का बजगा बनाकर खाया और अपने परिजनों को खिलाया। कार्तिक शुक्ल पंचमी को छठव्रतियों ने पूरे दिन व्रत रहकर शाम में पूजा करके रोटी-खीर खाया तथा परिजनों,रिश्तेदारों सहित मित्रों को प्रसाद खिलाया। इसके बाद पूरे दिन निर्जला उपवास रहकर कार्तिक शुक्ल षष्ठी को नदी, तालाब, सरोवर,आहर,पोखर एवं पानी भरे टप में खङा होकर सूप मे ठेकुआ, तरह-तरह के फल और दीया रखकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पण किया।





